इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
हज़रत मौलाना अब्दुल हन्नान साहब क़ासमी के इंतक़ाल की ख़बर सुनकर दिल बेहद ग़मगीन और उदास है। यह ख़बर मेरे लिए ख़ास तौर से अफ़सोस नाक है।
हज़रत के बयान हमेशा बड़े शौक़ और मोहब्बत से सुना करता था। उनकी बातों में ऐसी तासीर थी कि सीधे दिल पर असर करती थी।
ख़ास तौर पर मौत, आख़िरत, मोहब्बत और भाई-बहनों के रिश्तों की अहमियत पर जब हज़रत बयान फ़रमाते थे, तो इंसान कुछ देर के लिए दुनिया की भागदौड़ भूलकर अपने आप को और अपनी आख़िरत को देखने लगता था। कई बार उनके बयान सुनते-सुनते आँखों में आँसू आ जाते थे।
आज वही आवाज़ हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई, यह सोचकर दिल और भी भारी हो जाता है। कुछ लोग दुनिया से चले जाते हैं, लेकिन उनकी नसीहतें, उनकी बातें और उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में ज़िंदा रहती हैं।
अल्लाह तआला हज़रत मौलाना अब्दुल हन्नान साहब क़ासमी की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।
अल्लाह उनके तमाम घरवालों, अज़ीज़ों, तालिब-ए-इल्मों और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-अज़ीम अता फ़रमाए।
अल्लाह उनकी इल्मी और दीनी ख़िदमात को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया बनाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।










