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*केशव पोद्दार का बयान बना चर्चा का केंद्र, बोले—‘बंगाल में भाजपा की सरकार, विपक्ष में कौन रहेगा इसकी लड़ाई’*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*केशव पोद्दार का बयान बना चर्चा का केंद्र, बोले—‘बंगाल में भाजपा की सरकार, विपक्ष में कौन रहेगा इसकी लड़ाई’*

कुल्टी: कुल्टी के युवा भाजपा नेता एवं मंत्री डॉ. अजय कुमार पोद्दार के पुत्र केशव पोद्दार का एक बयान इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बंगाल में भाजपा की सरकार है और अब सवाल यह है कि राज्य में विपक्ष की मुख्य भूमिका कौन निभाएगा।
इसी बीच एक अलग राजनीतिक एंगल भी सामने आ रहा है, जिसमें कांग्रेस की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि भाजपा राज्य में उनकी पार्टी और पार्टी कार्यालयों को निशाना बना रही है। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि पार्टी वास्तव में ऐसा चाहती या ऐसा करने का इरादा रखती, तो पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का एक भी पार्टी कार्यालय मौजूद नहीं रहता, लेकिन भाजपा की विचारधारा और सिद्धांत ऐसे किसी भी कार्य की अनुमति नहीं देते और पार्टी इस तरह की गतिविधियों में कभी शामिल नहीं होती।
केशव पोद्दार ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस कथित गुटबाजी के कारण कमजोर हो चुकी है और कांग्रेस इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। वहीं, वाम दल भी लंबे समय बाद अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के प्रयास में जुटे हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विपक्षी राजनीति का स्वरूप किस दिशा में जाएगा, यह देखने वाली बात होगी। उनके मुताबिक कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होती दिखाई दे रही है।
केशव पोद्दार ने यह भी कहा कि बंगाल की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन किस राजनीतिक दल को मिलेगा, इसे लेकर भी अलग-अलग दलों के बीच राजनीतिक संघर्ष जारी है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं।
केशव पोद्दार के इस बयान के बाद बंगाल की विपक्षी राजनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। उनके बयान को भाजपा के राजनीतिक दृष्टिकोण और राज्य में विपक्ष की संभावित तस्वीर से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब सवाल यही है—क्या बंगाल की राजनीति में भाजपा के सामने विपक्ष की मुख्य भूमिका के लिए तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वाम दलों के बीच नई राजनीतिक लड़ाई देखने को मिलेगी?