नारी शक्ति से बदलेगा समाज: अग्रसेन भवन में गूंजा महिला सशक्तिकरण का शंखनाद
सीतारामपुर में जिला स्तरीय प्रथम महिला सम्मेलन का भव्य आयोजन;
भारी संख्या में उमड़ी मातृशक्ति- गर्भस्थ काल से ही शुरू हो जाते हैं बच्चे के संस्कार, सही खान-पान और सात्विक विचार जरूरी:चुन्नी आर्या
नियामतपुर:हरिद्वार शक्तिकुंज के निर्देश पर गुरुवार को सीतारामपुर स्थित अग्रसेन भवन में एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। परम वंदनीय माताजी की जन्म शताब्दी अनुयाज के पावन अवसर पर जिला स्तरीय प्रथम महिला सम्मेलन का शानदार आयोजन किया गया। इस महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और बिखरते पारिवारिक संस्कारों के प्रति जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम में पूरे जिले से आईं सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लेकर समाज सुधार का सामूहिक संकल्प लिया। गर्भ से ही संस्कार की नींवपश्चिम बर्धमान गायत्री परिवार की संचालिका चुन्नी आर्या ने अपने ओजस्वी और प्रेरणादायी संबोधन से हॉल में मौजूद हर महिला को प्रभावित किया। उन्होंने पूज्य गुरुदेव के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा:संस्कार की शुरुआत: बच्चे को संस्कार देने की प्रक्रिया उसके जन्म के बाद नहीं, बल्कि गर्भस्थकाल से ही प्रारम्भ हो जानी चाहिए।माता का प्रभाव: गर्भवती माता यदि सही आहार, सकारात्मक चिंतन और अच्छे संस्कार अपनाती है, तो नवजात शिशु में श्रेष्ठ गुण स्वतः ही स्थापित हो जाते हैं।कुरीतियों के खिलाफ जंग: उन्होंने उपस्थित महिलाओं से दहेज प्रथा, नशा और समाज में फैली अन्य कुरीतियों के खिलाफ एकजुट होकर सतर्क व सशक्त होने का पुरजोर आह्वान किया।शिक्षा और परवरिश ही असली ताकतबालिका विद्यालय की पूर्व प्रधानाध्यापिका ममता मिश्रा ने कार्यक्रम की संक्षिप्त रूपरेखा साझा की। उन्होंने नई पीढ़ी के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि एक शिक्षित और जागरूक मां ही परिवार और समाज की रीढ़ होती है। बच्चों की सही परवरिश से ही देश का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है। समाजसेवियों का मिला भरपूर सहयोगइस बड़े आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यवसायी व समाजसेवी बीरेंद्र सिंह तथा समाजसेवी निर्मल मध्यदेशिया ने बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका निभाई। सम्मेलन में नीतू बर्नवाल, साक्षी पोद्दार, सुजाता केशरी, बिमला यादव और रीना शाव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं उपस्थित रहीं।बदलेगा नजरिया: इस सम्मेलन ने स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भरता, पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन और समाजीकरण के क्षेत्र में एक नया और प्रगतिशील दृष्टिकोण देकर प्रेरित किया है।










