*मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी नदवी के निधन से ज्ञान और साहित्य के एक युग का अंत: डॉ. अम्मार रिज़वी*
*ऑल इंडिया माइनॉरिटीज फोरम की शोक सभा आयोजित*
लखनऊ, (प्रेस विज्ञप्ति): ऑल इंडिया माइनॉरिटीज फोरम फॉर डेमोक्रेसी की एक शोक सभा फोरम के अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिज़वी की अध्यक्षता में फोरम कार्यालय, पार्क रोड, लखनऊ में आयोजित हुई। फोरम के अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिज़वी ने कहा कि मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी नदवी के निधन की खबर से उन्हें गहरा दुख हुआ है। उनके निधन से देश और समाज ने एक महान धर्मशास्त्री, प्रख्यात शिक्षाविद्, अरबी भाषा एवं साहित्य के उच्चकोटि के शोधकर्ता, साहित्यकार और विद्वान व्यक्तित्व को खो दिया है। उनका निधन शैक्षिक, साहित्यिक और धार्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी नदवी ने अपना पूरा जीवन ज्ञान, शिक्षा, अरबी भाषा एवं साहित्य, शोध तथा धार्मिक सेवाओं के लिए समर्पित कर दिया। अरबी भाषा एवं साहित्य के विकास तथा भारत की अरबी विद्वत एवं साहित्यिक परंपरा को मजबूत बनाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय रहा। नदवतुल उलमा, लखनऊ से उनका संबंध अत्यंत गहरा और पुराना था। उन्होंने नदवा की शैक्षिक एवं विद्वत परंपराओं को आगे बढ़ाने तथा उसे और सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक शिक्षक, शोधकर्ता, लेखक और प्रशासक के रूप में उनकी सेवाओं को हमेशा याद किया जाएगा। उनकी विद्वतपूर्ण मार्गदर्शन से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने लाभ उठाया, जो आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अरबी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में मौलाना आज़मी नदवी की सेवाओं का विशेष महत्व है। उन्होंने अरबी साहित्य, शोध, आलोचना और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण एवं मूल्यवान कार्य किया तथा भारत की अरबी विद्वत परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अरबी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उनकी असाधारण सेवाओं के सम्मान में उन्हें भारत के राष्ट्रपति के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
मौलाना की सेवाएं केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं थीं। उन्होंने आधुनिक उच्च शिक्षा के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के चांसलर के रूप में विश्वविद्यालय की शैक्षिक एवं अकादमिक प्रगति में अपना योगदान दिया। उनका दृष्टिकोण व्यापक और बहुआयामी था। वे ज्ञान, शोध, आधुनिक शिक्षा तथा नैतिक एवं धार्मिक संस्कार को समाज की प्रगति के लिए आवश्यक मानते थे।
आज डॉ. अम्मार रिज़वी के आवास पर मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी नदवी के निधन पर आयोजित शोक सभा में मौलाना की विद्वतापूर्ण, साहित्यिक, धार्मिक और शैक्षिक सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर फोरम के विभिन्न सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए मौलाना को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि मौलाना आज़मी नदवी का निधन केवल एक बुजुर्ग धर्मगुरु का निधन नहीं, बल्कि ज्ञान और साहित्य की एक उज्ज्वल परंपरा के महत्वपूर्ण अध्याय का समापन है। उनकी विद्वत विरासत, उनकी रचनाएं, उनकी सेवाएं और उनके शिष्य आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी स्मृति को जीवित रखेंगे।
आज के दौर में जब समाज को ज्ञान, सहिष्णुता, उदारता, नैतिकता और आपसी सम्मान की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है, मौलाना आज़मी नदवी का जीवन और उनकी सेवाएं हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी नदवी के परिजनों, उनके शिष्यों, नदवतुल उलमा के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों तथा उनसे जुड़े सभी लोगों के प्रति हार्दिक संवेदना और गहरी सहानुभूति व्यक्त की गई।
अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनके दर्जे बुलंद फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में उच्च स्थान प्रदान करे तथा उनके परिजनों, शिष्यों और सभी संबंधित लोगों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
महमूदाबाद में डॉ. अम्मार रिज़वी के प्रबंधन में संचालित शिक्षण संस्थान मौलाना आज़ाद इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमैनिटीज, साइंस एंड टेक्नोलॉजी (प्रस्तावित मौलाना आज़ाद रूरल यूनिवर्सिटी) तथा अन्य शैक्षिक संस्थानों में शोक सभा के बाद अवकाश घोषित कर दिया गया।
इस बैठक में विशेष रूप से प्रोफेसर माह रुख मिर्ज़ा, फरकान बेग, असलम बेग, नदीम अब्बास, काशिफ हसन, फ़राज़ हसन, कुमैल नक़वी, अफ़ज़ल रिज़वी, शान अली, सैयद जमील हसन नक़वी, असद मारूफ़ मुनी, अबू शहमा अंसारी, इरफ़ान मंसूरी, वसीम अहमद, मौलाना जलालुद्दीन, रवि प्रकाश यादव, राजेश प्रसाद, श्रीकांत दुबे, शहाबुद्दीन खान, अतीक अंसारी, डॉ. इहतिशाम खान, डॉ. शाकिया आदि उपस्थित रहे।यह जानकारी ऑल इंडिया माइनॉरिटीज फोरम फॉर डेमोक्रेसी के सचिव (नश्रो-इशाअत) अबू शहमा अंसारी ने दी।







