चुनाव से पहले बेदखली पर विरोध, सत्ता मिलते ही अभियान फिर शुरू! कुल्टी में बीसीसीएल की कार्रवाई पर कांग्रेस का हमला
रवि यादव ने मंत्री डॉ. अजय पोद्दार को घेरा, भाजपा नेता केशव पोद्दार ने आरोपों को बताया राजनीतिक बयानबाजी; कंपनी की जमीन पर रहने वाले परिवारों के भविष्य को लेकर बढ़ा विवाद
कुल्टी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद कुल्टी में बीसीसीएल की जमीन पर रहने वाले लोगों को बेदखल करने के मुद्दे ने एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। चुनाव से पहले जिन इलाकों में बेदखली के नोटिस को लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए थे और तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी डॉ. अजय पोद्दार ने लोगों को बेदखल नहीं होने देने की बात कही थी, उन्हीं इलाकों में अब दोबारा बेदखली अभियान शुरू होने के आरोप सामने आ रहे हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता रवि यादव ने मुखर होकर राज्य सरकार के मंत्री डॉ. अजय पोद्दार को निशाने पर लिया है। वहीं, भाजपा नेता केशव पोद्दार ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए पलटवार किया है।

चुनाव से पहले विरोध, अब कार्रवाई पर उठे सवाल
कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बीसीसीएल की जमीन पर लंबे समय से रह रहे लोगों को चुनाव से पहले कंपनी की ओर से जमीन खाली करने के नोटिस दिए जाने की बात सामने आई थी। इन नोटिसों के बाद प्रभावित परिवारों के बीच चिंता बढ़ी थी। स्थानीय लोगों के आवास और भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी डॉ. अजय पोद्दार के नेतृत्व में विरोध-प्रदर्शन भी हुआ था। उस दौरान लोगों को बेदखल नहीं होने देने की बात कही गई थी।
लेकिन अब चुनाव समाप्त होने और डॉ. अजय पोद्दार के राज्य सरकार में मंत्री बनने के बाद बेदखली अभियान दोबारा शुरू होने की खबरों ने पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है। कांग्रेस ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर भाजपा और मंत्री के पुराने रुख पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि चुनाव से पहले जनता को राहत देने की बात कही गई थी, इसलिए अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रभावित परिवारों को राहत मिलेगी या उन्हें अपनी जमीन और घर छोड़ने की नौबत आएगी।
रवि यादव का सवाल—चुनाव से पहले जनता के साथ, अब चुप्पी क्यों?
कांग्रेस नेता रवि यादव ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव से पहले जब बीसीसीएल की ओर से बेदखली के नोटिस दिए गए थे, तब डॉ. अजय पोद्दार ने इसका विरोध किया था और लोगों को भरोसा दिलाया था कि किसी को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन अब चुनाव खत्म हो चुका है और वे मंत्री बन गए हैं, ऐसे में फिर से बेदखली की कार्रवाई की बात सामने आ रही है।
रवि यादव का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनता के हितों की बात करने वाले नेताओं को अब प्रभावित परिवारों की परेशानियों पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उस समय बेदखली की कार्रवाई गलत थी, तो अब उसी तरह की कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? और यदि कंपनी की जमीन खाली कराने की कोई कानूनी प्रक्रिया चल रही है, तो प्रभावित परिवारों को उसका स्पष्ट विवरण क्यों नहीं दिया जा रहा?
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस विवाद का सबसे गंभीर पहलू उन गरीब परिवारों का भविष्य है, जो वर्षों से इन इलाकों में रह रहे हैं। उनके अनुसार, राजनीति से ऊपर उठकर यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी भी परिवार को बिना उचित प्रक्रिया, स्पष्ट सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किए संकट में न डाला जाए।
मंत्री के कार्यालय में बीसीसीएल अधिकारियों की बैठक की तस्वीर चर्चा में
इस विवाद के बीच एक तस्वीर भी चर्चा में है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि बीसीसीएल के कुछ अधिकारी मंत्री डॉ. अजय पोद्दार के कार्यालय में बैठकर उनसे बातचीत कर रहे हैं। इस तस्वीर को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
कुछ लोगों की ओर से यह आरोप लगाया जा रहा है कि मंत्री और बीसीसीएल अधिकारियों के बीच मिलीभगत के कारण कुछ मामलों में कथित तौर पर पैसे के बदले बेदखली की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, इस गंभीर आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। केवल किसी बैठक की तस्वीर के आधार पर न तो मिलीभगत और न ही पैसे के लेन-देन को प्रमाणित माना जा सकता है।
इसलिए पूरे मामले में तस्वीर की प्रामाणिकता, बैठक का उद्देश्य, बेदखली संबंधी आदेशों और संबंधित दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना भी उचित नहीं होगा।
केशव पोद्दार का पलटवार—कांग्रेस राजनीतिक जमीन तलाश रही है
दूसरी ओर, भाजपा नेता केशव पोद्दार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठा रही है। उनके मुताबिक, कांग्रेस बेवजह आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।
केशव पोद्दार ने कांग्रेस से सवाल किया कि जब तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी, तब कांग्रेस कहां थी? उस समय गरीब जनता के हितों के लिए उसने क्या संघर्ष किया और अब अचानक उसे लोगों की परेशानियों की चिंता क्यों होने लगी है?
भाजपा नेता का कहना है कि कांग्रेस को केवल आरोप लगाने के बजाय अपने पुराने राजनीतिक रुख और जनता के लिए किए गए कार्यों का भी हिसाब देना चाहिए। इस तरह भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर देखा जा रहा है।
बीसीसीएल की भूमिका और प्रभावित परिवारों को जवाब का इंतजार
कुल्टी में बेदखली का मुद्दा अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। इससे जुड़े परिवारों के लिए यह उनके घर, रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की सुरक्षा का सवाल है। ऐसे में बीसीसीएल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह संबंधित जमीन की स्थिति, जारी किए गए नोटिस, प्रस्तावित कार्रवाई और प्रभावित लोगों के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों के बारे में स्पष्ट जानकारी दे।
यदि बेदखली की प्रक्रिया नियमों के तहत चलाई जा रही है, तो संबंधित दस्तावेजों और कानूनी आधार को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं, यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उनकी जांच कर सच्चाई सामने लाना जरूरी है।
फिलहाल इस पूरे विवाद में कांग्रेस के आरोप और भाजपा का पलटवार आमने-सामने हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन परिवारों का है, जिनके सिर पर बेघर होने का खतरा मंडराने की आशंका जताई जा रही है। चुनाव से पहले किए गए आश्वासनों, वर्तमान कार्रवाई और कंपनी की वास्तविक नीति के बीच क्या संबंध है, इसका जवाब बीसीसीएल प्रबंधन और संबंधित जनप्रतिनिधियों को देना चाहिए। प्रभावित परिवारों को केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट और भरोसेमंद जवाब चाहिए।










