विजया दशमी के उल्लास के बीच श्रमिक एकता का नया संकल्प: बर्नपुर में बीएमएस का गर्मजोशी से स्वागत
बर्नपुर, 31 अक्टूबर।
विजया दशमी का पर्व केवल उत्सव और उल्लास का अवसर नहीं, बल्कि अन्याय पर न्याय, निराशा पर आशा और असत्य पर सत्य की विजय का शाश्वत संदेश भी है। इसी सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकजुटता की भावना को आत्मसात करते हुए शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को अपराह्न 3:30 बजे बर्नपुर स्थित पब्लिक हेल्थ विभाग के संविदा कर्मियों द्वारा विजया दशमी मिलन समारोह एवं भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), बर्नपुर के स्वागत में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में 100 से अधिक संविदा कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि श्रमिक समाज अब अपने अधिकारों, सम्मान और भविष्य से जुड़े प्रश्नों पर संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करना चाहता है। समारोह का वातावरण आत्मीयता, पारस्परिक विश्वास और श्रमिक एकता की भावना से ओतप्रोत रहा।
इस अवसर पर बीएमएस, बर्नपुर की ओर से अजय कुमार सिंह (अध्यक्ष, बीआईकेएस), महेश बनर्जी (अध्यक्ष, बीटीएमएस), संजीत प्रसाद (महासचिव, बीटीएमएस), अमित सिंह, अशोक सिंह, सतीश कुमार, कृपाशंकर एवं रवि रजक सहित अनेक श्रमिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
वहीं पब्लिक हेल्थ विभाग के संविदा कर्मियों की ओर से दीपक घासी, राजू सेन, सुब्रत दास, बिजय बाल्मीकि, दीपक दीप, किशन हरी, पाचू हरी, गौतम बाउरी, दीपका दीप घासी, पूर्णिमा देवी हेलो, शीला घासी एवं सुमिता देवी हेलो सहित बड़ी संख्या में श्रमिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
समारोह का विशेष आकर्षण संविदा कर्मियों द्वारा बीएमएस के प्रति व्यक्त किया गया विश्वास और स्वागत भाव रहा। श्रमिकों ने अपनी अपेक्षाओं, समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर संगठन के समक्ष अपनी भावनाएं रखीं। इस अवसर पर यह भावना भी मुखर हुई कि श्रमिकों का वास्तविक सम्मान केवल उत्सवों और औपचारिक आश्वासनों से नहीं, बल्कि उनके जीवन में ठोस परिवर्तन लाने वाले निर्णयों से सुनिश्चित होता है।
बीएमएस, बर्नपुर की ओर से श्रमिकों को आश्वस्त किया गया कि नए वेतन प्रावधानों का शीघ्र क्रियान्वयन, बकाया राशि का भुगतान तथा नए श्रम कानूनों के अंतर्गत संविदा कर्मियों को मिलने वाले वैधानिक अधिकारों और सुविधाओं को सुनिश्चित कराने के लिए संगठन पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ प्रयास करेगा।
विशेष रूप से न्यूनतम एवं समयबद्ध वेतन भुगतान, नियुक्ति पत्र की उपलब्धता, सामाजिक सुरक्षा, ईएसआई एवं भविष्य निधि की पात्रतानुसार सुविधा, कार्यस्थल पर स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE), चिकित्सा परीक्षण तथा सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियों जैसे विषयों को संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल बताया गया।
वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि संविदा श्रमिक किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान की कार्यप्रणाली के केवल सहायक अंग नहीं, बल्कि उसके उत्पादन और संचालन की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। उनके श्रम और योगदान के बिना औद्योगिक व्यवस्था की कल्पना अधूरी है। अतः उनके अधिकारों, सुरक्षा और सामाजिक गरिमा को किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
बीएमएस की ओर से यह भी संदेश दिया गया कि संगठन का उद्देश्य केवल मांगों को उठाना नहीं, बल्कि श्रमिकों और प्रबंधन के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर समस्याओं का न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करना है। जहां संवाद से समाधान संभव होगा, वहां संवाद का मार्ग अपनाया जाएगा; लेकिन श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की उपेक्षा होने पर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष भी जारी रहेगा।
कार्यक्रम ने एक बार फिर यह स्थापित किया कि श्रमिक एकता किसी एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि साझा अधिकारों, परस्पर विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी से निर्मित एक सतत यात्रा है। विजया दशमी के पावन अवसर पर आयोजित यह मिलन समारोह संविदा कर्मियों के लिए केवल स्वागत कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता और एक नए विश्वास का प्रतीक बनकर सामने आया।
संदेश स्पष्ट था—श्रम का सम्मान हो, श्रमिक को अधिकार मिले और विकास की प्रत्येक उपलब्धि में उसके योगदान को उचित स्थान मिले। क्योंकि किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान की वास्तविक समृद्धि उसके भवनों और मशीनों से नहीं, बल्कि उन हाथों के सम्मान से मापी जाती है, जो दिन-रात उसके भविष्य का निर्माण करते हैं।










