कराटे से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मरक्षा की क्षमता का होता है विकास – डॉ. रजी अहमद सिद्दीकी
मार्शल आर्ट्स स्पोर्ट्स एसोसिएशन गोरखपुर द्वारा कराटे बेल्ट टेस्ट एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन
कराटे केवल खेल नहीं, बल्कि आत्मरक्षा, आत्मविश्वास और बेहतर व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम – मोहम्मद इरफान
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
मार्शल आर्ट्स स्पोर्ट्स एसोसिएशन गोरखपुर के तत्वावधान में ब्लॉसम एकेडमी पब्लिक स्कूल, गोरखनाथ (ईस्ट), राजेंद्र नगर, गोरखपुर में कराटे बेल्ट टेस्ट, बेल्ट प्रमोशन सेरेमनी, मेडल एवं प्रमाणपत्र वितरण तथा विद्यार्थियों की उपलब्धियों के उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन, आत्मविश्वास और कराटे कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन कराटे प्रशिक्षक मोहम्मद इरफान (ब्लैक बेल्ट तृतीय डान) के नेतृत्व में किया गया। उनके सहयोगी सहायक कोच शरीफुल इस्लाम (ब्लैक बेल्ट प्रथम डान) ने आयोजन को सफल बनाने में मदद की।

मुख्य अतिथि डॉ. रजी अहमद सिद्दीकी ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि खेलकूद और मार्शल आर्ट्स बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कराटे के अभ्यास से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, एकाग्रता, धैर्य और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रत्येक बच्चे को आत्मरक्षा का बुनियादी प्रशिक्षण मिलना चाहिए, ताकि वह विपरीत परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रह सके। कराटे बच्चों को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी सशक्त बनाता है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों से बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलकूद एवं मार्शल आर्ट्स की गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर अभ्यास, मेहनत और सकारात्मक सोच आवश्यक है। ब्लॉसम एकेडमी पब्लिक स्कूल की निदेशक श्रीमती शिखा सिंह ने कहा कि विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास पर ध्यान देना भी आवश्यक है। कराटे जैसी खेल गतिविधियां बच्चों को अनुशासित जीवन जीने, समय का सदुपयोग करने और लक्ष्य निर्धारित करके उसे प्राप्त करने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का ज्ञान विशेष रूप से बालिकाओं के लिए उपयोगी है। कराटे का प्रशिक्षण बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, आत्मरक्षा के साथ-साथ बच्चों को संयम, विवेक और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना भी सीखनी चाहिए। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रतियोगिता में भाग लेना भी अपने आप में एक उपलब्धि है। प्रत्येक विद्यार्थी को हार-जीत से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मेनका गंधा श्रीवास्तव ने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में खेलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर, जिम्मेदार, अनुशासित और आत्मविश्वासी नागरिक बनाना भी है। उन्होंने कहा कि कराटे के नियमित अभ्यास से विद्यार्थियों में एकाग्रता, धैर्य, शारीरिक संतुलन और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलती है। इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने आयोजन से जुड़े प्रशिक्षकों और सभी सहयोगियों की सराहना करते हुए प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को भविष्य में भी खेलों के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के आयोजक एवं मुख्य कराटे प्रशिक्षक मोहम्मद इरफान (ब्लैक बेल्ट तृतीय डान) ने कहा कि कराटे केवल एक मार्शल आर्ट या मुकाबले का खेल नहीं है, बल्कि यह आत्मरक्षा, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास की एक प्रभावी विधा है। इसका वास्तविक उद्देश्य किसी को हराना या अपनी ताकत का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि स्वयं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम बनाना और जरूरत पड़ने पर अपनी सुरक्षा करना है। उन्होंने कहा कि कराटे के नियमित अभ्यास से बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता, धैर्य, सहनशीलता और आत्मनियंत्रण जैसे गुण विकसित होते हैं। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को सिखाया जाता है कि अपनी शक्ति का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करें तथा किसी भी परिस्थिति में उसका दुरुपयोग न करें।
कोच मोहम्मद इरफान ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और विशेष रूप से बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा का प्रशिक्षण अत्यंत उपयोगी है। कराटे का ज्ञान उन्हें अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना सिखाता है। साथ ही, प्रशिक्षण बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि बेल्ट टेस्ट का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को अगली बेल्ट प्रदान करना नहीं है, बल्कि उनके अभ्यास, तकनीक, अनुशासन, आत्मविश्वास और सीखी गई कला का मूल्यांकन करना भी है। प्रत्येक बेल्ट विद्यार्थियों की मेहनत, निरंतर अभ्यास और सीखने की यात्रा का प्रतीक होती है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अभ्यास, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और धैर्य ही अच्छे खिलाड़ी की पहचान हैं। विद्यार्थियों को कराटे का प्रशिक्षण खेल भावना, विनम्रता और आत्मरक्षा की भावना के साथ ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलकूद और मार्शल आर्ट्स के लिए समय दें, ताकि उनका शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास बेहतर तरीके से हो सके।
कार्यक्रम में मार्शल आर्ट्स एवं कराटे जगत से जुड़े मोहम्मद अहसान (कराटे कोच, ब्लैक बेल्ट), मोहम्मद इसहाक (ब्लैक बेल्ट द्वितीय डान), चंद्र प्रकाश मौर्य (ब्लैक बेल्ट द्वितीय डान), शितो-र्यू कराटे डो एकेडमी से जुड़े प्रतिनिधि, धर्मेंद्र कुमार (ब्लैक बेल्ट द्वितीय डान), ऑल इंडिया आशिहारा कराटे ऑर्गेनाइजेशन तथा डेंटिस्ट डॉ. अफजल अहमद (डेंटल हाइजीनिस्ट) वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों के उत्साह, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ खेलकूद और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना समय की आवश्यकता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम में ब्लॉसम एकेडमी पब्लिक स्कूल के उप-प्रधानाचार्य श्री संतोष कुमार पांडेय, वरिष्ठ पीआरटी श्रीमती लक्ष्मी जायसवाल, श्रीमती राधा साहा, श्री राजीव कुमार भट्ट, श्रीमती निधि श्रीवास्तव, श्रीमती श्वेता सिंघल, श्रीमती पूनम पटेल, श्रीमती रीना बनर्जी, श्रीमती रत्ना सिंह, श्री अंकित कुमार राय, सुश्री गुंजन बुधवानी, सुश्री महरोज सदफ, सुश्री स्वाति पांडेय, सुश्री हर्षिता सिंह, सुश्री स्नेहा मिश्रा, श्री आशीष निषाद (कंप्यूटर शिक्षक), श्रीमती नीलम सिंह, सुश्री शेजल गुप्ता एवं श्रीमती प्रगति सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता में बालिका वर्ग की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए उत्कृष्ट स्थान प्राप्त किए। बालिका वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्राएं अनुष्का, अद्विका श्रीवास्तव, आध्या राजनंदिनी, अन्वी शर्मा, अन्नाया श्रीवास्तव, वान्या वर्मा बालिका वर्ग में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली छात्राएं वैष्णवी कुशवाहा, अद्रिजा वर्मा
बालक वर्ग के प्रतिभागियों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए कराटे की विभिन्न तकनीकों, शारीरिक संतुलन और अनुशासन का परिचय दिया।
बालक वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र अभय त्रिपाठी, शिवांश के. गोंड, कृष्णम सोनकर, बृजेन्द्र रत्न, अनुज नागवंशी, अर्णव त्रिपाठी, आदित्य चौरसिया, आकर्ष वात्सल, स्वराज पांडेय, सूर्यांश, अद्विक पांडेय, त्रिशय प्रताप मिश्रा बालक वर्ग में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र अंजनेय के. गुप्ता, प्रांजल पराशर।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मरक्षा की भावना, आत्मविश्वास, अनुशासन तथा शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देना था। कराटे बेल्ट टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता, अभ्यास और प्रशिक्षण के प्रति समर्पण को परखने का अवसर मिला।
उपस्थित अतिथियों, प्रशिक्षकों और विद्यालय परिवार ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें नियमित अभ्यास करने, खेल भावना बनाए रखने और अपने कौशल को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि कराटे केवल शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आत्मनियंत्रण, सम्मान, अनुशासन और आत्मरक्षा की कला है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच विकसित करने तथा उन्हें आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।










