“इस दुनिया में जहाँ अधिकतर लोग अपने करियर और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की दौड़ में उलझे रहते हैं, वहीं कुछ विरले लोग ऐसे भी होते हैं जो आत्मा की पुकार को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे ही एक दुर्लभ व्यक्तित्व हैं इस्को स्टील प्लांट (SAIL ISP), बर्नपुर के मुख्य महा प्रबंधक (वित्त एवं लेखा) श्री विनय कुमार बाजपेयी जी। उनका समय से पहले SAIL से त्यागपत्र देना सिर्फ एक औपचारिक कार्यवाही नहीं, बल्कि एक गूढ़ संदेश है – आत्मा की शांति पद और प्रतिष्ठा से कहीं ऊपर है।
*“एक मुस्कान जो आत्मा को सुकून देती थी”*
विनय सर की पहचान केवल एक अनुभवी वित्त अधिकारी की नहीं थी, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की थी जिनकी मुस्कान हर दिल को सुकून देती थी। हर परिस्थिति में शांत, संयमित और सकारात्मक ऊर्जा से भरे हुए विनय सर, एक सच्चे मार्गदर्शक की भूमिका में थे। उनकी मुस्कान केवल चेहरे का भाव नहीं बल्कि आत्मा की स्थिरता का प्रतीक थी।
जब वे दुर्गापुर से स्थानांतरित होकर ISP बर्नपुर आए, तो उन्होंने बड़ी सरलता से समझाया कि कैसे उत्पादन में सुधार से कंपनी के वित्तीय परिणामों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि डेब्रिस प्रतिशत कम किया जाए, तो लाभ बढ़ सकता है; और यदि फाइनल प्रोडक्ट का रीसायकलिंग कम हो, तो कंपनी का मुनाफा अधिक होगा।
उनकी सोच पारंपरिक सीमाओं से परे थी। वे हर कार्य में नवीनता, पारदर्शिता और समझदारी लाते थे। वे फाइलों में नहीं, लोगों में विश्वास करते थे।
तीन वर्षों से CGM पद पर सफलता पूर्वक कार्यरत विनय सर की कार्यशैली, ईमानदारी और दूरदर्शिता को देखते हुए यह स्पष्ट था कि वे कम से कम कार्यपालक निदेशक (वित्त) के पद तक तो अवश्य पहुँचते और शायद SAIL के निदेशक (वित्त) भी बन सकते थे। लेकिन उन्होंने इस सबको त्याग दिया। क्यों? क्योंकि उनकी आत्मा उन्हें उनके जन्मभूमि की सेवा के लिए पुकार रही थी।
*“गाँव की ओर लौटना: कर्म से धर्म की यात्रा”*
लखनऊ से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित अपने पैतृक गाँव में अब विनय सर समाज सेवा के कार्यों में जुटेंगे। उन्होंने वहाँ कच्ची मिट्टी से घर बनवाए हैं, गाँव के स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का निश्चय किया है, और किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी देने का लक्ष्य तय किया है।
यह कदम केवल सेवा का नहीं, बल्कि एक आंदोलन का प्रतीक है। यह इस बात का साक्ष्य है कि सच्ची संतुष्टि पद, पैसे और प्रतिष्ठा से नहीं बल्कि सेवा और सादगी में है।
उनकी पत्नी स्वयं SAIL-DSP में महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। उनकी दो बेटियाँ हैं – बड़ी बेटी विदेश में कार्यरत हैं और छोटी बेटी IIM गया में अध्ययनरत हैं। यानी हर दृष्टिकोण से उनका जीवन व्यवस्थित है। लेकिन इसके बावजूद विनय सर ने अपने गाँव को चुना – वहाँ की मिट्टी, वहाँ की ज़रूरतें और वहाँ का भविष्य उनका नया कर्मक्षेत्र है।
वित्त विभाग में उनकी पारदर्शिता, निर्णय लेने की क्षमता और टीम के साथ समन्वय, SAIL ISP की कार्य संस्कृति में एक नयी ऊर्जा लाए। उनके मार्गदर्शन में लोगों ने सीखा कि कैसे वित्त विभाग केवल नंबरों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह उत्पादन, मानव संसाधन और कंपनी के मिशन के साथ गहराई से जुड़ा होता है।
वे हमेशा आगे बढ़ने का रास्ता दिखाते थे, लेकिन साथ ही दूसरों को साथ लेकर चलने का विश्वास भी दिलाते थे। उनका योगदान न केवल आंकड़ों में, बल्कि सैकड़ों कर्मचारियों की सोच में दर्ज हो गया है।
*“एक प्रेरणा जो अमिट है”*
जब आज के समय में लोग रिटायरमेंट के बाद भी संविदा पर बने रहना चाहते हैं, तब विनय सर ने अपने पद और करियर को अलविदा कहकर यह बता दिया कि सेवा केवल दफ्तरों की चारदीवारी में सीमित नहीं होती। सेवा वहीं सच्ची होती है जहाँ दिल से की जाती है, बिना किसी स्वार्थ के।
उनकी यह यात्रा पद से परे, प्रतिष्ठा से ऊपर और आत्मा की शांति के लिए है।
श्री विनय कुमार बाजपेयी सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक आदर्श हैं – एक आंदोलन, एक प्रेरणा, एक ऐसी रोशनी जो आने वाली पीढ़ियों को सही रास्ता दिखाएगी। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि सबसे बड़ी उपाधि इंसानियत होती है और सबसे बड़ा ओहदा सेवा।
SAIL ISP और समस्त SAIL परिवार की ओर से उन्हें हार्दिक धन्यवाद और शुभकामनाएँ।
*– एक कृतज्ञ सहकर्मी की ओर से..*
✍️ : *“सुशील कुमार सुमन”*
अध्यक्ष, IOA
SAIL ISP Burnpur





















