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सेवा ही संकल्प: मंत्री बनने के बाद भी चैंबर लौटे डॉ. अजय पोद्दार, सोमवार मरीजों का किया इलाज

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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सेवा ही संकल्प: मंत्री बनने के बाद भी चैंबर लौटे डॉ. अजय पोद्दार, सोमवार मरीजों का किया इलाज

बराकर:राजनीति में ऊंचा पद मिलने के बाद अक्सर जनसेवकों के तौर-तरीके बदल जाते हैं, लेकिन कुल्टी विधानसभा के विधायक और नवनियुक्त मंत्री डॉ. अजय कुमार पोद्दार ने एक बार फिर साबित किया है कि वे पहले एक डॉक्टर हैं, फिर राजनेता। मंत्री पद की शपथ लेने के बाद सोमवार की संध्या डॉ. पोद्दार बराकर स्टेशन रोड स्थित ‘पेड़ा गली’ के अपने पुराने क्लिनिक पहुंचे। वहां उन्होंने आम दिनों की तरह ही बेहद सादगी से अपने चैंबर में बैठकर मरीजों की जांच की और उन्हें दवाइयां लिखीं।’जनप्रतिनिधि से पहले डॉक्टर हूं, सेवा ही मूल धर्म’क्लिनिक में मरीजों को देखने के दौरान डॉ. अजय पोद्दार ने कहा, “मैं एक जनप्रतिनिधि बनने से पहले एक डॉक्टर हूं। मेरा सर्वप्रथम और मूल कार्य समाज को चिकित्सा सेवा प्रदान करना है। प्रशासनिक व्यवस्था और समय की पाबंदी जरूर है, लेकिन जब भी मुझे इन सांगठनिक और सरकारी कार्यों से वक्त मिलेगा, मैं अपने क्लिनिक पहुंचूंगा। मैं अपने मरीजों से ज्यादा दिनों तक दूर नहीं रह सकता।”RSS के स्वयंसेवक से मंत्री पद तक का सफरडॉ. पोद्दार का यह अंदाज उनके पुराने परिचितों के लिए नया नहीं है। एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे। इसके बाद वे जनसंघ में शामिल हुए और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक कर्मठ सिपाही के रूप में लगातार जमीन पर काम करते रहे।2016: पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।2021: कुल्टी विधानसभा से शानदार जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने।2026: इस वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए बंपर मतों से दोबारा जीत हासिल की और सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।व्यस्तता के बीच भी नहीं छूटा ‘मरीजों का साथ’इलाके के लोग उन्हें आदर से ‘डॉक्टर साहब’ कहकर ही पुकारते हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, साल 2021 में पहली बार विधायक बनने के बाद भी डॉक्टर साहब ने शाम को मरीजों को देखना कभी बंद नहीं किया। केवल विधानसभा सत्र या पार्टी के अनिवार्य कार्यक्रमों के दौरान ही वे क्लिनिक से नदारद रहते हैं। जैसे ही वे कोलकाता या सांगठनिक दौरों से लौटते हैं, सीधे अपने चैंबर पहुंच जाते हैं। मंत्री बनने के बाद भी उनके इस सेवा भाव को देखकर क्षेत्र की जनता और मरीजों में उनके प्रति सम्मान और ज्यादा बढ़ गया है।