*जामुड़िया में गोविंद नगर गुरुद्वारा विवाद गहराया*
*”अंदर-बाहर” के भेदभाव और बाय कट के आरोपों पर कमेटी और संगत आमने-सामने*
*जामुड़िया* : आसनसोल नगर निगम के वार्ड संख्या 12 स्थित गोविंद नगर गुरुद्वारा में सिख समाज के एकता को लेकर विवाद सामने आया है। “बाहर से आए सिखों को पद न देने” और “बाय कट कर बहिष्कार” करने के आरोपों को लेकर सोमवार को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और संगत के सदस्य तरसेम सिंह ने अलग-अलग संवाददाता सम्मेलन कर एक-दूसरे पर पलटवार किया।
*कमेटी ने सभी आरोपों को किया खारिज*
गुरुद्वारा प्रांगण में हुई प्रेस वार्ता में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सतनाम सिंह और गोविंद नगर गुरुद्वारा के सदस्य ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा।
इस दौरान गोविंद नगर गुरुद्वारा के प्रधान सतनाम सिंह ने कहा, “गोविंद नगर के किसी भी निवासी ने आज तक यह बात नहीं कही है कि जो सिख समाज के लोग बाहर से आए हैं उनको गुरुद्वारा में कोई पद नहीं दिया जाएगा। हम लोग इस बारे में सोच भी नहीं सकते। गुरुद्वारा सभी के लिए है।”
उन्होंने तरसेम सिंह पर लगे “बाय कट” के आरोप को भी नकारते हुए कहा कि “गुरुद्वारा के अंदर तरसेम सिंह के लिए किसी भी पदाधिकारी या संगत ने बाय कट शब्द का प्रयोग नहीं किया है।”
वहीं प्रधान सतनाम सिंह ने कहा, “तरसेम सिंह की ओर से गुरुद्वारा के कम्युनिटी हॉल में प्रकाश दिवस मनाने के लिए कोई लिखित आवेदन हमें प्राप्त नहीं हुआ है। बिना लिखित अनुमति के हॉल देना संभव नहीं है। हम सभी संगत को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं।”
*तरसेम सिंह ने चलाया ऑडियो, लगाए गंभीर आरोप*
दूसरी ओर संगत के सदस्य तरसेम सिंह ने भी पत्रकारों को बुलाकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने गोविंद नगर निवासी प्रताप सिंह का एक ऑडियो पत्रकारों को सुनाया। उस ऑडियो में प्रताप सिंह कहते सुनाई दे रहे हैं कि “गोविंद नगर में सिख समाज के लोग बाहर से आए हैं, उनका गोविंद नगर गुरुद्वारा में कोई भी पद नहीं मिल सकता।”
तरसेम सिंह ने कहा, “सिख समाज जोड़ने का काम करता है, तोड़ने का नहीं। मुझे दूसरी बार भी गुरुद्वारा में किसी पद की लालसा नहीं है और न ही मुझे कोई पद चाहिए। मेरी सिर्फ एक ही मांग है कि गोविंद नगर के सिख समाज के लोग आपस में मिलजुल कर रहें। अंदर और बाहर की बात बंद हो।”
उन्होंने सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “गुरुद्वारा के अंदर मेरे साथ सीधा-सीधा बाय कट का व्यवहार किया गया। मुझे बहिष्कार किया गया। सिख धर्म में कभी भी बॉयकॉट या बहिष्कार की परंपरा नहीं रही है। यह बाय कट शब्द गुरुद्वारा सिख संगत प्रबंधक कमेटी के उप प्रधान मोहन सिंह द्वारा कहा गया था। इस शब्द से मुझे बहुत ठेस और आघात पहुंचा है।”
*2 महीने पहले दी थी लिखित शिकायत*
तरसेम सिंह ने कहा कि “अंदर-बाहर” के भेदभाव को लेकर उन्होंने 2 महीने पहले भी लिखित तौर पर गुरुद्वारा के प्रधान को शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने सवाल उठाया, “आज प्रधान सतनाम सिंह कहते हैं कि हम सभी को लेकर चलते हैं। अगर ऐसा है तो फिर उन्होंने सभी संगत की बैठक बुलाकर अंदर और बाहर वाली बात पर चर्चा क्यों नहीं की?”
तरसेम सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर गुरुद्वारा कमेटी बैठकर इस मुद्दे को नहीं सुलझाती है तो हम इसे बहुत दूर तक ले जाएंगे। अभी भी समय है, आपस में बैठकर इस बात को सुलझाएं और इस विवाद को समाप्त करें।”
*संगत में नाराजगी*
इस पूरे विवाद के बाद गोविंद नगर की सिख संगत में भी नाराजगी देखी जा रही है। संगत का कहना है कि गुरुद्वारा एक पवित्र स्थान है और यहाँ भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इस विवाद को सुलझाने के लिए सर्वसम्मति से बैठक बुलाकर कोई निर्णय लेती है या मामला और तूल पकड़ता है।










