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महिला पत्रकारों की निर्मम मारपीट के विरोध में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन।

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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महिला पत्रकारों की निर्मम मारपीट के विरोध में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन।

महिला पत्रकारों की गरिमा से समझौता
बर्दाश्त नहीं – इरशाद कुरैशी

छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र।

महिला पत्रकारों शाहीन खान (4 पीएम न्यूज नेटवर्क) एवं नफीसा खान (स्वतंत्र पत्रकार) के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित रूप से की गई मारपीट की घटना को लेकर इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ® मराठवाड़ा, महाराष्ट्र की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार, अभद्रता और मारपीट को लोकतांत्रिक मूल्यों तथा स्वतंत्र पत्रकारिता पर गंभीर हमला बताते हुए संगठन ने माननीय राष्ट्रपति महोदया के नाम डिविजनल कमिश्नर, छत्रपति संभाजीनगर के माध्यम से सात सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, धमकी, उत्पीड़न अथवा समाचार कवरेज में बाधा डालना केवल किसी पत्रकार के अधिकारों का हनन नहीं है, बल्कि जनता के जानने के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय है।
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ® ने मांग की कि शाहीन खान एवं नफीसा खान के साथ हुई कथित मारपीट की घटना की निष्पक्ष, स्वतंत्र, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच को प्रभावित करने की किसी भी संभावना को समाप्त करते हुए दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। संगठन ने महिला पत्रकारों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने, समाचार कवरेज, प्रदर्शन, धरना, घटनास्थल, सरकारी कार्यालयों तथा सार्वजनिक स्थानों पर पत्रकारों को निर्भीक होकर कार्य करने के लिए स्पष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की भी मांग की। ज्ञापन में पत्रकारों पर हमला, धमकी, जबरन रोकने, कैमरा अथवा अन्य उपकरण छीनने, समाचार कवरेज में बाधा डालने या उत्पीड़न की शिकायत मिलने पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई। एसोसिएशन ने पत्रकारों के विरुद्ध दुर्भावनापूर्ण, प्रतिशोधात्मक अथवा दबाव बनाने के उद्देश्य से दर्ज किए जाने वाले कथित झूठे मुकदमों की उच्चस्तरीय समीक्षा के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाने तथा जरूरत पड़ने पर पत्रकारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। संगठन ने केंद्र सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी एवं व्यावहारिक पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की भी पुरजोर मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि पत्रकारों पर हमले, धमकी, उत्पीड़न और दबाव की घटनाओं पर तत्काल एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था समय की आवश्यकता है।
दैनिक औरंगाबाद सिटीजन्स के संपादक एवं प्रदेश संरक्षक मराठवाड़ा इरशाद कुरैशी ने कहा कि महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट की घटना अत्यंत चिंताजनक है। पत्रकार अपना कार्य किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समाज और जनता तक वास्तविक जानकारी पहुंचाने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष मराठवाड़ा मोहम्मद ताबिश ने कहा कि पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र की आवाज को दबाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पत्रकार जब किसी घटना की रिपोर्टिंग करता है तो वह समाज के सामने सच्चाई रखने का दायित्व निभाता है। यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो वह निर्भीक होकर जनता की समस्याओं और शासन-प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को कैसे सामने लाएगा। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों के साथ हुई घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई होना आवश्यक है।
प्रदेश संगठन सचिव सैय्यद अनवर कादरी ने कहा कि देशभर में पत्रकारों को विभिन्न प्रकार के दबाव, धमकी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। कई बार पत्रकारों को समाचार कवरेज से रोकने, धमकाने अथवा उनके उपकरण छीनने जैसी शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून होना बेहद जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग को गंभीरता से लेने की अपील की।
जिला अध्यक्ष कलीमुद्दीन ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के सवाल पर संगठन किसी भी स्तर पर पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए देशभर के पत्रकारों को एकजुट होकर लोकतांत्रिक एवं कानूनी तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने पत्रकार सुरक्षा कानून को समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक बताया।
एडीएन न्यूज के हुसैन पटेल ने कहा कि घटनास्थल पर पत्रकार अक्सर जोखिम उठाकर समाचार और तस्वीरें जुटाते हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि पत्रकारों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को समाचार कवरेज से रोकना या उनके काम में अनावश्यक बाधा डालना लोकतांत्रिक पत्रकारिता के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने पत्रकार सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू करने की मांग की।
लोकमत के पत्रकार सलमान खान ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनता तक तथ्य और सच्चाई पहुंचाना है। यदि पत्रकारों को धमकाया जाएगा या उनके खिलाफ दबाव बनाया जाएगा तो इसका सीधा असर जनता तक पहुंचने वाली सूचनाओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण देना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ® ने स्पष्ट किया कि यदि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो संगठन लोकतांत्रिक एवं कानूनी तरीके से देशभर के पत्रकारों को एकजुट कर चरणबद्ध आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाने के लिए बाध्य होगा। संगठन ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना है।
इस दौरान पत्रकारों एवं संगठन के पदाधिकारियों ने महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान को न्याय, सुरक्षा एवं सम्मान दिलाने तथा पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एकजुटता का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में दैनिक औरंगाबाद सिटीजन्स के संपादक एवं प्रदेश संरक्षक मराठवाड़ा इरशाद कुरैशी, प्रदेश अध्यक्ष मराठवाड़ा मोहम्मद ताबिश, प्रदेश संगठन सचिव सैय्यद अनवर कादरी, औरंगाबाद टाइम्स के जिला अध्यक्ष कलीमुद्दीन, एडीएन न्यूज के हुसैन पटेल, लोकमत के सलमान खान, जिला संगठन सचिव सैय्यद जाकिर अहमद, जिला महासचिव अजीम खान सहित बड़ी संख्या में पत्रकार एवं संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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