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*डॉ. इक्तेदार हुसैन फारूकी की वैज्ञानिक एवं शैक्षिक सेवाएं कुरआन की समझ का महत्वपूर्ण माध्यम हैं: डॉ. अम्मार रिज़वी*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*डॉ. इक्तेदार हुसैन फारूकी की वैज्ञानिक एवं शैक्षिक सेवाएं कुरआन की समझ का महत्वपूर्ण माध्यम हैं: डॉ. अम्मार रिज़वी*

*‘‘हैवानात फ़िल कुरआनिल करीम’’ के विमोचन के साथ ‘‘नबातात-ए-कुरआन’’ और ‘‘नबातात-ए-तिब्ब-ए-नबवी’’ के नए संस्करण भी जारी*

लखनऊ, (प्रेस विज्ञप्ति): उर्दू साइंटिफिक सोसाइटी के तत्वावधान में प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. इक्तेदार हुसैन फारूकी की पुस्तक ‘‘हैवानात फ़िल कुरआनिल करीम’’ के विमोचन तथा ‘‘नबातात-ए-कुरआन’’ एवं ‘‘नबातात-ए-तिब्ब-ए-नबवी’’ के नए संस्करण जारी करने का समारोह आरिफ अपार्टमेंट, न्यू हैदराबाद, लखनऊ में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री एवं ऑल इंडिया माइनॉरिटीज़ फोरम फॉर डेमोक्रेसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिज़वी ने की।
समारोह में इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रोफेसर सैयद वसीम अख्तर, एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डॉ. अब्बास अली मेहंदी, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रशीद फारूकी तथा अन्य विद्वानों एवं साहित्यकारों ने भाग लिया। डॉ. रशीद फारूकी ने अतिथियों का स्वागत किया।
‘‘हैवानात फ़िल कुरआनिल करीम’’ में कुरआन-ए-करीम में वर्णित जीव-जंतुओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करते हुए उनके महत्व तथा मनुष्य के साथ उनके संबंधों को रेखांकित किया गया है। इससे पूर्व डॉ. इक्तेदार हुसैन फारूकी की चर्चित पुस्तकें ‘‘नबातात-ए-कुरआन’’ और ‘‘नबातात-ए-तिब्ब-ए-नबवी’’ भी प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें कुरआन में वर्णित वनस्पतियों का विस्तृत परिचय, वैज्ञानिक जानकारी तथा तिब्ब-ए-नबवी से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री शामिल है। इन पुस्तकों को अपने विषय पर दुर्लभ और महत्वपूर्ण विद्वतापूर्ण सामग्री बताया गया।
डॉ. अम्मार रिज़वी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. इक्तेदार हुसैन फारूकी की बहुमूल्य वैज्ञानिक, शैक्षिक एवं शोध संबंधी सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कुरआन-ए-करीम से संबंधित वैज्ञानिक जानकारियों को उर्दू और अंग्रेजी में सरल एवं आमफहम भाषा में प्रस्तुत किया है, जो वैज्ञानिक ज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी पुस्तकों के माध्यम से कुरआन-ए-करीम में वर्णित वनस्पतियों, तिब्ब-ए-नबवी और जीव-जंतुओं के संबंध में उपयोगी एवं शोधपरक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि डॉ. फारूकी की विद्वतापूर्ण सेवाएं नई पीढ़ी के लिए मूल्यवान धरोहर हैं और उनके कार्य को व्यापक स्तर पर आम जनता तक पहुंचाने की आवश्यकता है। डॉ. रिज़वी ने घोषणा की कि उनकी वैज्ञानिक एवं शैक्षिक सेवाओं के सम्मान में शीघ्र ही एक सार्वजनिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया जाएगा।
समारोह को संबोधित करते हुए अन्य वक्ताओं ने भी डॉ. फारूकी की सेवाओं की सराहना की। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि डॉ. इक्तेदार हुसैन फारूकी की विद्वतापूर्ण एवं वैज्ञानिक सेवाओं को देश के प्रमुख उलेमा और साहित्यकार पहले ही स्वीकार करते रहे हैं, हालांकि उनके प्रयासों को आम जनता के स्तर पर परिचित कराने की आवश्यकता है।
प्रोफेसर सैयद वसीम अख्तर ने डॉ. फारूकी की कुरआनी एवं वैज्ञानिक सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पुस्तकों के माध्यम से कुरआन-ए-करीम के विभिन्न विषयों को सरल एवं आमफहम तरीके से समझने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है।
प्रोफेसर डॉ. अब्बास अली मेहंदी ने कहा कि डॉ. इक्तेदार हुसैन फारूकी ने अपनी पुस्तकों के माध्यम से कुरआनी ज्ञान को समझने में महत्वपूर्ण विद्वतापूर्ण सहयोग प्रदान किया है। वनस्पतियों और तिब्ब-ए-नबवी से संबंधित उनके द्वारा प्रस्तुत जानकारी दुर्लभ और मूल्यवान है।
डॉ. सुल्तान शाकिर हाशमी ने कहा कि डॉ. फारूकी ने अपनी पुस्तकों के माध्यम से कुरआनी ज्ञान को उर्दू और अंग्रेजी में प्रस्तुत किया। वहीं, उर्दू साइंटिफिक सोसाइटी के मंच से महत्वपूर्ण विषयों पर सेमिनार आयोजित कर उन्होंने आम जनता में वैज्ञानिक चेतना जागृत की और उन्हें कुरआन की समझ की ओर प्रेरित किया, जो सराहनीय है।
समारोह में डॉ. फरीद जुबैरी, शेख अफजल अली, मोहम्मद अंसार अली और अनवर फारूकी ने भी भाग लिया।

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