बरसों के आरोप, जेल और मुश्किलों के बाद आखिर इंसाफ की जीत — कटक के मौलाना अब्दुर रहमान बाइज्जत बरी
कटक, 26 मई : कटक से एक महत्वपूर्ण अदालती खबर सामने आई है, जहां वर्षों से मुकदमों और गंभीर आरोपों का सामना कर रहे मौलाना अब्दुर रहमान को आखिरकार बड़ी राहत मिली है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने सबूतों के अभाव में उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। इस फैसले के बाद उनके परिवार और करीबी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं यह मामला एक बार फिर न्याय व्यवस्था, लंबी कानूनी प्रक्रिया और इंसानी जिंदगी पर लगने वाले आरोपों के प्रभाव को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

जानकारी के अनुसार जिला जज ने स्पष्ट कहा कि मामले में ऐसे ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके, जिनके आधार पर मौलाना अब्दुर रहमान को दोषी ठहराया जा सके। इसके बाद अदालत ने उन्हें निर्दोष मानते हुए रिहा करने का आदेश दिया। इससे पहले जमशेदपुर की अदालत भी उन्हें निर्दोष घोषित कर चुकी थी।
गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले में उन्हें सात साल की सजा सुनाई थी, जिसकी अवधि वे पूरी कर चुके हैं। वर्ष 2016 में उन्हें सालेपुर के पश्चिमकच्छ इलाके से गिरफ्तार किया गया था। उस समय जांच एजेंसियों ने उन पर अल-कायदा से संबंध रखने का आरोप लगाया था।
बताया जाता है कि अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय एक नेटवर्क है और इसी कथित संबंध के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। हालांकि वर्षों तक चली अदालती प्रक्रिया के बाद अब अलग-अलग अदालतों से राहत मिलने के बाद यह मामला नई बहस को जन्म दे रहा है।
अदालती फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे इंसाफ की जीत बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जांच प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की जरूरत है, ताकि कोई निर्दोष व्यक्ति वर्षों तक तकलीफ न झेले।
बालासोर से अज़ीम बालासोरी की रिपोर्ट।










