बराकर में नशे का बढ़ता खतरा, बच्चों की लत से परिवार परेशान
माता-पिता बोले—नशे की गिरफ्त में जा रही युवा पीढ़ी, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
बराकर। कुल्टी विधानसभा क्षेत्र के बराकर और आसपास के इलाकों में नशे की लत को लेकर परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। खासकर कम उम्र के युवाओं में नशे की आदत को लेकर कई परिवार बेहद परेशान नजर आ रहे हैं। कुछ अभिभावकों का कहना है कि नशे की गिरफ्त में आने के बाद बच्चों के व्यवहार और पारिवारिक जीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है।
बराकर के आरा डंगाल इलाके से सामने आई कुछ परिवारों की आपबीती बेहद दर्दनाक है। परिजनों का कहना है कि नशे की लत के कारण उनके बच्चों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ रहा है। कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि नशे की जरूरत पूरी करने के लिए घर का सामान तक बेचने या चोरी करने जैसी स्थिति पैदा हो गई है। कई माता-पिता अपने बच्चों को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं।
परिजनों की पीड़ा सुनना भी किसी के लिए आसान नहीं था। एक तरफ अपने बच्चों को नशे से बचाने की चिंता और दूसरी तरफ परिवार की आर्थिक स्थिति—इन दोनों के बीच कई अभिभावक खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं।
हालांकि पश्चिम बर्धमान में नशीले पदार्थों के खिलाफ पुलिस और विशेष कार्यबल की कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। हाल में राज्य विशेष कार्यबल की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए जाने और आरोपियों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट भी सामने आई है। वहीं बराकर क्षेत्र से जुड़े एक मामले में नाबालिगों के गांजा सेवन का उल्लेख करते हुए रेलवे पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने की रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी।
इसके बावजूद स्थानीय परिवारों की चिंता यह है कि नशे की पहुंच को जड़ से रोकने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई की जरूरत है। बराकर पुलिस क्षेत्र में बराकर पुलिस चौकी और कुल्टी थाना के स्तर पर पुलिस व्यवस्था मौजूद है।
अब सवाल यह है कि नशे की गिरफ्त में फंस रहे युवाओं को कैसे बचाया जाए? केवल नशा बेचने वालों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नशे के आदी युवाओं के इलाज, परामर्श और पुनर्वास पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग है कि बराकर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में नशीले पदार्थों की बिक्री और आपूर्ति पर प्रभावी निगरानी बढ़ाई जाए तथा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता और पुनर्वास अभियान चलाया जाए। परिवारों का कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो नशे की समस्या कई और घरों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।










