“‘सितंबर की उस सुबह का आलोक,
गूँजी एक स्वर में जग की शोक।
*११ सितंबर, अठारह सौ तिरानबे,*
सजी धर्म संसद, जग के नाम से।
*“पर्मानेंट मेमोरियल आर्ट पैलेस” का प्रांगण,*
आज है “आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ़ शिकागो” का दर्पण।
सात हज़ार आत्माएँ थमीं हुईं,
एक युवा संन्यासी की प्रतीक्षा में जमीं हुईं।
पीली केसरिया वेशभूषा का तेज,
नेत्रों में गंगा सा निर्मल नेह।
कंठ में शंख-सा गंभीर कंपन,
हृदय में था परंपरा का स्पंदन।
लंबे इंतज़ार और हल्की घबराहट में,
उन्होंने किया प्रणाम माँ सरस्वती के चरण में।
क्षण भर में लगा कोई शक्ति अवतरित,
ऋषियों की वाणी, रामकृष्ण की प्रेरणा समाहित।
फिर उठे वह स्वर, गगन में निनाद,
“Sisters and Brothers of America!” का आह्वान।
तालियाँ गूँजीं, गगन गड़गड़ाया,
दो मिनट खड़ा हुआ सारा सभागार सर झुकाया।
उन्होंने कहा, “भारत की ओर से नमन है,
सबसे प्राचीन संन्यास परंपरा का वंदन है।
जिसने सिखाया जग को सहिष्णुता,
और दिखाया सार्वभौमिक स्वीकृति का पथ।”
१५ सितंबर – Why We Disagree
कहानी सुनाई कुएँ के मेंढक की,
जो समझे अपना कुआँ ही सागर की सीमा की।
समुद्र का मेंढक कहे, “बाहर विशाल जलधि है।”
पर कुएँ का मेंढक बोले, “यह असंभव सत्य है।”
विवेकानंद ने कहा – यही है झगड़े का कारण,
हिंदू, मुस्लिम, ईसाई – सबने बाँध रखे छोटे-छोटे आँगन।
अपनी सीमा से बाहर नहीं देख पाए,
विश्व का विराट स्वरूप समझ न पाए।
१९ सितंबर – Paper on Hinduism
उन्होंने खोला धर्म का प्राचीन खजाना,
“सनातन धर्म” का अर्थ समझाना।
ज़ोरोस्ट्रियन, यहूदी और वैदिक प्रकाश,
सहनशीलता और वेदांत की दी अनोखी परिभाष।
आत्मा, परमात्मा और शरीर का रहस्य,
हिंदू धर्म का अनादि-अनंत प्रत्यय।
हर प्राणी में है एक ही ज्योति,
वही है वेदांत, वही सनातन की ओजस्वी ज्योति।
२० सितंबर – Religion Not the Crying Need of India
उन्होंने कहा –
“धर्म नहीं, भूख मिटाना ज़रूरी है,
गरीब की कराह सुनना प्राथमिकता पूरी है।
मिशनरियों का उद्देश्य आत्मा बचाना नहीं,
बल्कि भूखे को अन्न और वस्त्र देना सही।”
उनकी वाणी थी करुणा का उद्गार,
भारत के निर्धनों के लिए उठी पुकार।
२६ सितंबर – Buddhism, the Fulfillment of Hinduism
उन्होंने कहा –
“हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म में भेद कहाँ?
दोनों एक ही सत्य की खोज के हैं गवाह।
बिना बौद्ध धर्म हिंदू धर्म अधूरा,
बिना हिंदू धर्म बौद्ध धर्म अधूरा।
दोनों साथ मिलकर ही खिलते हैं,
जैसे कमल और सरोवर मिलते हैं।”
२७ सितंबर – Address at the Final Session
अंतिम दिन गूँजीं उनकी वाणी,
“पवित्रता, करुणा किसी एक धर्म की संपत्ति नहीं।
हर धर्म ने दिए हैं महापुरुष महान,
हर परंपरा में है मानवता का गान।”
उन्होंने पुकारा –
“Fight नहीं, Help करो,
Destruction नहीं, Assimilation करो,
Dissension नहीं, Harmony और Peace लाओ।”
पूरा सभागार गूँज उठा,
विश्व ने भारत का संदेश सुन लिया।
अमेरिका ने उन्हें नायक कहा,
मानवता ने नया मार्ग देखा।
शिकागो से उठी वह वाणी,
आज भी गूँजती है हर प्राणी।
२०१२ में फिर से हुई धर्म संसद महान,
वॉशिंगटन काली मंदिर में हुआ आयोजन।
१५०वीं जयंती पर फिर हुआ स्मरण,
विवेकानंद का संदेश रहा अमर अमर।
हिंदू धर्म – सबसे पुराना जीवन पथ,
“सनातन धर्म” – शाश्वत और अनादि सत्य।
धर्म का सार – सहिष्णुता, करुणा और प्रेम,
मानव मात्र में है वही एक चेतना का क्षेम।
विश्व हिंदू कांग्रेस ने भी दिया पुकार,
*“एकता में है शक्ति, जागो बारंबार।”*
फर्जी कथा, फर्जी समाचार से लड़ो,
अपने दृष्टिकोण से नई कहानी गढ़ो।
विवेकानंद का संदेश है गगन गूँजता,
आज भी मानवता का पथ दिखाता।
“शिकागो की गूँज” आज भी है प्रेरणा,
सहनशीलता, एकता, और मानवता का सेतु बना।
भारत की आत्मा, ऋषियों की वाणी,
रामकृष्ण का संदेश और समय की रागिनी।
युगों-युगों तक अमर रहेगा यह स्वर,
“सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ़ अमेरिका!” की गूँज अमिट, अमर।”*
✍️ “सुशील कुमार सुमन”
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी, बर्नपुर..
*#सुशीलकुमारसुमन*
#युवा








