सरकारी स्कूल में RSS कैंप या कानून की खुली अनदेखी? बराकर में बवाल, कांग्रेस ने पूछा—स्कूल में पढ़ाई होगी या लाठी-भाला चलेगा!
कुल्टी। बराकर के बलतोड़िया इलाके में स्थित विक्टोरिया वेस्ट कोलियरी फ्री प्राइमरी स्कूल में कथित तौर पर आरएसएस का कैंप आयोजित किए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। कैंप से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे सरकारी स्कूल के इस्तेमाल और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए सवाल खड़े किए हैं।

मामले की जानकारी लेने के लिए कांग्रेस नेता रवि यादव स्कूल पहुंचे और प्रधानाध्यापक से पूरे कार्यक्रम को लेकर पूछताछ की। रवि यादव के अनुसार, स्कूल की ओर से उन्हें एक पत्र दिखाया गया, जिसमें कथित तौर पर अनुमति से संबंधित जानकारी थी। उनका दावा है कि प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल के एसआई की ओर से फोन पर अनुमति दी गई थी तथा बीसीसीएल के महाप्रबंधक कार्यालय और कुल्टी थाना में भी पत्र प्राप्त होने का रिकॉर्ड मौजूद है।
रवि यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी स्कूल बच्चों की शिक्षा के लिए होते हैं, किसी संगठन के प्रशिक्षण शिविर के लिए नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस स्कूल में बच्चों के बीच समानता और अनुशासन की बात की जाती है, उसी परिसर में लाठी-भाला चलाने जैसी गतिविधियां कराई जा रही हैं।
उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि अगर सरकारी स्कूलों में ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति दी जा रही है तो फिर प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अनुमति किस स्तर से मिली और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
“पुलिस का काम कानून-व्यवस्था संभालना है या कैंप करवाना?”
रवि यादव ने पुलिस प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इलाके में अपराध और अवैध गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन पुलिस का ध्यान दूसरी गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर पुलिस ने किसी संगठन का कैंप करवाने की जिम्मेदारी ही ले ली है तो फिर पुलिस की वर्दी पहनने की जरूरत क्या है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि “अगर सब कुछ नियम के तहत हुआ है तो अनुमति का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए और अगर नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।”
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग के एक आदेश में स्कूल भवन और परिसर को गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने से पहले सक्षम प्राधिकरण की अनुमति की बात कही गई है। इसके अलावा राज्य सरकार ने सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने के संबंध में भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में बलतोड़िया के इस सरकारी स्कूल में वास्तव में किस अनुमति के आधार पर कैंप आयोजित हुआ, अनुमति किस अधिकारी ने दी और कार्यक्रम की प्रकृति क्या थी, यह जांच का विषय बन गया है।
रवि यादव ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकारी स्कूल किसी भी राजनीतिक या संगठनात्मक गतिविधि का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यही है—अगर अनुमति थी तो किसने दी, किस नियम के तहत दी और सरकारी स्कूल के परिसर में किस तरह की गतिविधि की इजाजत दी गई? इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।










