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*आईआईटी खड़गपुर में 11वें अंतरराष्ट्रीय स्पिक मैके सम्मेलन का भव्य समापन : ऐतिहासिक रात्रि संगीत महायज्ञ और सांस्कृतिक साधना का सप्ताह*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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*आईआईटी खड़गपुर में 11वें अंतरराष्ट्रीय स्पिक मैके सम्मेलन का भव्य समापन : ऐतिहासिक रात्रि संगीत महायज्ञ और सांस्कृतिक साधना का सप्ताह*

आईआईटी खड़गपुर, 01 जून 2026: आईआईटी खड़गपुर के प्लेटिनम जुबिली वर्ष समारोहों के अंतर्गत आयोजित 11वें अंतरराष्ट्रीय स्पिक मैके (SPIC MACAY) सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन 31 मई 2026 को हुआ। 25 से 31 मई तक आयोजित इस सप्ताहव्यापी सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से आए 1,500 से अधिक छात्र-प्रतिनिधियों, कलाकारों, विद्वानों एवं संस्कृति प्रेमियों ने भाग लिया और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विविध विधाओं का सजीव अनुभव प्राप्त किया।

सम्मेलन ने भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोककलाओं, शिल्प, योग, ध्यान एवं आध्यात्मिक परंपराओं के माध्यम से प्रतिभागियों को एक अनूठा सांस्कृतिक एवं आत्मिक अनुभव प्रदान किया। देश के प्रतिष्ठित गुरुओं एवं कलाकारों के मार्गदर्शन में आयोजित गहन प्रशिक्षण सत्रों का समापन छात्र प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिनमें प्रतिभागियों ने सप्ताहभर अर्जित ज्ञान और कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

*अविस्मरणीय रात्रि : संगीत साधना की ऐतिहासिक श्रृंखला*

सम्मेलन का सबसे प्रमुख आकर्षण अंतिम रात्रि आयोजित ‘ओवरनाइट कॉन्सर्ट सीरीज़’ रही, जो स्पिक मैके की विशिष्ट परंपरा का प्रतीक है। स्वयंसेवकों एवं आयोजकों के सम्मान समारोह के उपरांत रात्रि 8:30 बजे आरंभ हुई यह संगीत यात्रा प्रातः 6:00 बजे तक निरंतर चलती रही।

इस ऐतिहासिक संगीत श्रृंखला का शुभारंभ पद्म विभूषण डॉ. एन. राजम के भावपूर्ण हिंदुस्तानी वायलिन वादन से हुआ। उनकी प्रसिद्ध गायकी अंग शैली ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके पश्चात पद्मश्री विदुषी अश्विनी भिडे देशपांडे ने अपने मधुर एवं गहन हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन से रात्रि को संगीतमय ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

पद्मश्री पंडित तेजेंद्र नारायण मजूमदार ने अपने सरोद वादन से श्रोताओं को आत्ममंथन और संगीत साधना के अद्भुत अनुभव से परिचित कराया।

मध्यरात्रि के पश्चात संगीत कलानिधि सम्मान से अलंकृत विद्वान लालगुडी जी.जे.आर. कृष्णन एवं विदुषी लालगुडी विजयलक्ष्मी की कर्नाटक वायलिन युगलबंदी ने लालगुडी परंपरा की विलक्षणता और सौंदर्य को सजीव कर दिया।

प्रातःकालीन बेला में पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर के गंभीर एवं आध्यात्मिक ध्रुपद गायन के साथ यह अद्वितीय संगीत यात्रा अपने चरम पर पहुँची। डागरवाणी की प्राचीन परंपरा से सुसज्जित उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित श्रोताओं को गहन आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की।

अनेक प्रतिभागियों के लिए यह पूरी रात्रि जागकर महान कलाकारों के सान्निध्य में संगीत का रसास्वादन करना सम्मेलन का सबसे प्रेरणादायी एवं जीवनपरिवर्तनकारी अनुभव सिद्ध हुआ।

*विरासत भ्रमण के साथ हुआ समापन*

रात्रिकालीन संगीत समारोह के पश्चात सम्मेलन के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने आईआईटी खड़गपुर परिसर तथा आसपास के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विरासत भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें क्षेत्र की शैक्षणिक, स्थापत्य एवं सांस्कृतिक विरासत को निकट से जानने का अवसर मिला।

सम्मेलन की समाप्ति पर प्रतिभागी अपने साथ केवल स्मृतियाँ ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, सेवा, अनुशासन, ध्यान और परंपराओं के प्रति गहरी समझ तथा उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेकर लौटे।

11वें अंतरराष्ट्रीय स्पिक मैके सम्मेलन का सफल आयोजन एक बार पुनः इस तथ्य को रेखांकित करता है कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरित करने की अपार क्षमता रखती है और स्पिक मैके इस विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने के अपने मिशन को निरंतर सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहा है।

*प्रतीक दामा, जनसंपर्क अधिकारी, आईआईटी खड़गपुर,* ने कहा, “सम्मेलन के दौरान विद्यार्थियों और प्रतिभागियों का उत्साह भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति युवाओं की गहरी रुचि को दर्शाता है। हम स्पिक मैके, सभी कलाकारों, स्वयंसेवकों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने इस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता प्रदान की।”

जारीकर्ता:

प्रतीक दामा
जनसंपर्क अधिकारी
आईआईटी खड़गपुर