झारखंड का ‘रुगड़ा’ छाया आसनसोल के बाजार में, 1200 रुपये किलो बिक रही जंगली मशरूम की सब्जी
चिकन-मटन को स्वाद में दे रही टक्कर, सावन में शाकाहारी लोगों की पहली पसंद बना रुगड़ा, खरीदने के लिए बाजारों में उमड़ रही भीड़

रुगड़ा एक जंगली मशरूम है, जो मुख्य रूप से झारखंड के साल के जंगलों में बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता है। स्थानीय लोग इसे ‘पुटू’ के नाम से भी जानते हैं। यह मिट्टी के अंदर पैदा होता है और बाहर से सफेद गोल आकार का दिखाई देता है। इसे निकालने के लिए मिट्टी को सावधानी से हटाना पड़ता है, इसलिए इसकी उपलब्धता बेहद सीमित रहती है।
रुगड़ा का स्वाद इसकी सबसे बड़ी खासियत है। पकने के बाद इसका बाहरी हिस्सा हल्का कुरकुरा और अंदर का भाग बेहद मुलायम हो जाता है। स्वाद के कारण इसकी तुलना अक्सर चिकन और मटन से की जाती है। सावन के महीने में जब बड़ी संख्या में लोग मांसाहार से परहेज करते हैं, तब रुगड़ा स्वादिष्ट और पौष्टिक शाकाहारी विकल्प बनकर सामने आता है।
पश्चिम बंगाल में रुगड़ा को ‘छातु’ के नाम से जाना जाता है। यहां इसे मसालेदार तरीके से चिकन और मटन की शैली में पकाया जाता है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं। धीरे-धीरे यह बंगाल के लोगों का भी पसंदीदा मौसमी व्यंजन बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रुगड़ा मिट्टी के अंदर उगता है, इसलिए इसे पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी होता है। खरीदते समय एक-दो रुगड़ा काटकर उसकी ताजगी जरूर जांच लेनी चाहिए, ताकि खराब या सड़ा हुआ रुगड़ा घर न पहुंचे।
स्वाद, पोषण और सीमित उपलब्धता के कारण रुगड़ा को झारखंड का ‘अनमोल खजाना’ भी कहा जाता है। खेतों में इसकी खेती नहीं होती, बल्कि यह केवल मानसून के दौरान जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है। यही वजह है कि हर वर्ष इसके बाजार में आते ही इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। आज आसनसोल के बाजारों में भी रुगड़ा लोगों की पहली पसंद बन गया है।










