भाजपा सरकार बनते ही आसनसोल बस स्टैंड में ‘कट मनी’ पर ब्रेक
डेवलपमेंट फीस के नाम पर वर्षों से हो रही वसूली पर उठा बड़ा सवाल, भाजपा नेताओं ने कहा— “अब नहीं चलेगा सिंडिकेट राज”

आसनसोल, पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद आसनसोल बस स्टैंड में कथित “डेवलपमेंट फीस” और “कट मनी” वसूली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पिछले करीब 15 वर्षों से बसों से प्रतिदिन 10 से 20 रुपये तक की वसूली किए जाने के आरोपों के बीच भाजपा नेताओं और श्रमिक संगठनों ने इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग तेज कर दी है।
भाजपा नेताओं का दावा है कि बस स्टैंड के विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली हुई, लेकिन यात्रियों और बस चालकों को उसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला। अब भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस वसूली को बंद कराने की पहल शुरू कर दी है।

भाजपा नेता नीलू हाजरा ने कहा कि आसनसोल बस स्टैंड से प्रतिदिन सैकड़ों बसें संचालित होती हैं और वर्षों से उनसे “डेवलपमेंट फीस” के नाम पर पैसे लिए जाते रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह राशि नगर निगम के खाते में जमा हुई है तो उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा,
“भाजपा सरकार में कट मनी और सिंडिकेट संस्कृति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो अवैध वसूली करेगा वह जेल जाएगा और जो इसमें सहयोग करेगा उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।”
2014 के पुराने पत्र से फिर गरमाया मामला
पूर्व मेयर के पत्र में लाखों रुपये की गड़बड़ी का उल्लेख
इस विवाद को फिर से हवा तब मिली जब तृणमूल श्रमिक नेता राजू अहलूवालिया ने 2014 में तत्कालीन मेयर और पूर्व विधायक तापस बनर्जी द्वारा दक्षिण थाना प्रभारी को भेजे गए एक पत्र का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए।
पत्र के अनुसार, इस्माइल क्षेत्र निवासी अशिम मित्रा उर्फ “बच्चू” को बस एसोसिएशन की सिफारिश पर प्रति बस 5 रुपये “डेवलपमेंट फीस” वसूलने की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि अगस्त 2009 से फरवरी 2014 तक लगभग 26 लाख 40 हजार रुपये वसूले गए, लेकिन नगर निगम के खाते में केवल 8 लाख 39 हजार 350 रुपये ही जमा हुए।
नगर निगम की ओर से उस समय करीब 18 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा नहीं होने का दावा किया गया था और पुलिस से कार्रवाई की मांग भी की गई थी।
RTI के जरिए मांगा पूरा हिसाब
सरकारी बस स्टैंड से निजी व्यक्ति कैसे वसूली कर सकता है
राजू अहलूवालिया ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत आसनसोल नगर निगम से कई अहम सवाल पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा है कि:
किस नियम के तहत निजी व्यक्ति को वसूली की अनुमति दी गई?
कुल कितनी राशि वसूली गई?
निगम में कितनी राशि जमा हुई?
कितनी रकम अब भी बकाया है?
क्या आधिकारिक रसीद दी जाती थी?
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम बिना पारदर्शी प्रक्रिया के अपने “करीबी लोगों” को टेंडर देता है, जिसके कारण भ्रष्टाचार बढ़ता है।
भाजपा विधायक की चेतावनी
“कट मनी और सिंडिकेट संस्कृति खत्म होगी”
आसनसोल उत्तर से भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि यदि नगर निगम के नाम पर अवैध वसूली हो रही है तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा,
“भाजपा सरकार में किसी भी प्रकार की कट मनी, सिंडिकेट और भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं मिलेगा।
हर दिन हजारों की वसूली का दावा
600 से अधिक बसों से प्रतिदिन 13 हजार रुपये तक वसूली का आरोप
जानकारी के अनुसार आसनसोल बस स्टैंड में करीब 350 मिनी बसें और 250 बड़ी बसें संचालित होती हैं। यदि प्रत्येक बस से प्रतिदिन 10 रुपये लिए जाएं तो रोजाना लगभग 6,500 रुपये की वसूली होती है। वहीं 20 रुपये प्रति बस के हिसाब से यह राशि 13 हजार रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।
ऐसे में महीने और साल भर में यह रकम लाखों रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
बस चालकों में डर का माहौल
“विरोध करने पर दुर्व्यवहार और दबाव”
राजू अहलूवालिया का आरोप है कि कई बस चालक डर के कारण खुलकर विरोध नहीं कर पाते। उन्होंने दावा किया कि विरोध करने वालों के साथ कथित सिंडिकेट से जुड़े लोग दुर्व्यवहार और हाथापाई तक करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि वर्षों से वसूले गए पैसों का सही उपयोग हुआ होता तो आज बस स्टैंड में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलतीं। वर्तमान में पेयजल, शौचालय, प्रतीक्षालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति खराब बताई जा रही है।
अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर
क्या होगी निष्पक्ष जांच
भाजपा नेताओं, श्रमिक संगठनों और बस चालकों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद अब पूरे मामले में जिला प्रशासन और नगर निगम की भूमिका पर नजर टिकी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि “डेवलपमेंट फीस” के नाम पर वर्षों से वसूले गए लाखों रुपये आखिर कहां गए और क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो पाएगी।










