राष्ट्रीय महिला आयोग सम्मेलन : प्रोफेसर नंदिनी साहू ने समावेशी उच्च शिक्षा पर दिया ज़ोर
कोलकाता ( 7 अगस्त, 2026) : हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने ‘शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति में बदलाव की संवाहक के रूप में महिलाएं’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय महिला आयोग के सम्मेलन में विशिष्ट वक्ता के रूप में हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने एक ऐसी उच्च शिक्षा व्यवस्था बनाने का विचार रखा, जो सभी के लिए बराबर हो, महिलाओं के प्रति संवेदनशील हो और तकनीक से जुड़ी हो।

विख्यात विद्वानों, नीति निर्माताओं, विधायकों और शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर साहू ने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों को नए सिरे से तैयार करने की ज़रूरत बताई। उन्होंने छात्रों में समझ, सामाजिक जिम्मेदारी और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ाने के लिए स्त्रीवादी भाषाविज्ञान, जेंडर संवेदीकरण और महिला अध्ययन जैसे विषयों को जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़ी शिक्षा केवल दिखावे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे पढ़ाई-लिखाई की नीति और तौर-तरीकों का अहम हिस्सा बनना चाहिए।
डिजिटल शिक्षा के फायदों को रेखांकित करते हुए प्रोफेसर साहू ने डिजिटल लाइब्रेरी, ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई के मिले-जुले मॉडल और तकनीक की मदद से पढ़ाने के तरीकों को अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में सभी को अच्छी शिक्षा तभी मिल सकती है, जब तकनीक और समावेशी शिक्षण को सही तरीके से जोड़ा जाए।
उच्च शिक्षण संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी पर ध्यान दिलाते हुए प्रोफेसर साहू ने छात्रवृत्ति, आर्थिक मदद, हुनर सिखाने की पहलों, मार्गदर्शन, सलाह और रोजगार देने वाली ट्रेनिंग के ज़रिए ज़रूरतमंद और पीछे छूटे वर्गों के छात्रों को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को सामाजिक न्याय का माध्यम बनना चाहिए, ताकि शिक्षा समाज के सबसे कमज़ोर लोगों तक भी पहुँच सके।
सम्मेलन के दौरान भारत के शैक्षणिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक भविष्य को बेहतर बनाने में महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी प्रतिभागियों ने ऐसे नियमों, सुधारों और सांस्कृतिक पहलों पर विचार किया, जिनसे अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा मिल सके।
नीतियों में सबको शामिल करने, लैंगिक समानता, पढ़ाई में नए बदलाव और शिक्षा में सुधार पर प्रोफेसर साहू के इस वक्तव्य की उपस्थित लोगों ने सराहना की। उनके भाषण ने यह साबित किया कि ज्ञान, संस्कृति और देश के विकास में महिलाओं की भूमिका सबसे मुख्य है।








