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सिलिकोसिस से श्रमिक की मौत का आरोप: जाजू रश्मि रिफ्रैक्टरीज प्रबंधन से 20 लाख मुआवजे की मांग, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर हंगामा

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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सिलिकोसिस से श्रमिक की मौत का आरोप: जाजू रश्मि रिफ्रैक्टरीज प्रबंधन से 20 लाख मुआवजे की मांग, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर हंगामा

कुल्टी। कल्यानेश्वरी मंदिर के समीप कोदोविटा औद्योगिक क्षेत्र स्थित रेमिंग मास (पत्थर डस्ट) निर्माता कंपनी ‘जाजू रश्मि रिफ्रैक्टरीज लिमिटेड’ में कार्यरत एक श्रमिक की इलाज के दौरान मौत के बाद माहौल गरमा गया। मृतक श्रमिक की पहचान कृष्णा प्रसाद उर्फ छोटका के रूप में हुई है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि प्लांट में लगातार अत्यधिक धूल और सिलिका के संपर्क में रहने के कारण कृष्णा प्रसाद सिलिकोसिस जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ गए, जिससे उनकी जान चली गई। घटना के विरोध में परिजनों और स्थानीय भाजपा नेताओं ने शव के साथ कारखाना परिसर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।
इलाज के दौरान तोड़ा दम प्राप्त जानकारी के अनुसार, कृष्णा प्रसाद कंपनी में बतौर श्रमिक कार्यरत थे। काम के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें पहले ईएसआई अस्पताल ले जाया गया, जहां से स्थिति गंभीर होने पर उन्हें आसनसोल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों का कहना है कि चिकित्सकीय जांच में उनके फेफड़ों में गंभीर संक्रमण और क्षति की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने फेफड़ों के क्षतिग्रस्त होने का मुख्य कारण सिलिका युक्त धूल बताया। तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का आरोप श्रमिक की मौत के बाद स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्लांट में काम के दौरान धूल का स्तर अत्यधिक रहता है, फिर भी श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण—विशेषकर गुणवत्तापूर्ण मास्क—उपलब्ध नहीं कराए जाते। साथ ही, श्रमिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच में भी घोर लापरवाही बरती जा रही है।
गौरतलब है कि सालानपुर ब्लॉक क्षेत्र में सिलिकोसिस से मौत का यह पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी कई श्रमिकों की मौत के बाद जिला प्रशासन ने विशेष जांच टीम गठित कर क्षेत्र की रेमिंग मास इकाइयों का निरीक्षण किया था और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक सख्ती कम होते ही इन कंपनियों ने दोबारा नियमों और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाना शुरू कर दिया।
20 लाख मुआवजा और आश्रित को सहायता की मांग कारखाना परिसर में हुए हंगामे के बाद प्रबंधन के साथ हुई बातचीत में परिजनों ने 20 लाख रुपये मुआवजे और इलाज में हुए पूरे खर्च के भुगतान की मांग रखी। प्रबंधन द्वारा तत्काल अंतिम संस्कार का खर्च वहन करने पर सहमति जताई गई है।
बताया जा रहा है कि कंपनी का मुख्य प्रबंधन जयपुर (राजस्थान) से संचालित होता है। स्थानीय प्रबंधन ने कहा है कि उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद आगामी बैठक में मुआवजे पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। हालांकि, पूरे मामले पर मीडिया द्वारा कंपनी प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। अब सभी की निगाहें प्रबंधन के साथ होने वाली आगामी बैठक और पीड़ित परिवार को मिलने वाले न्याय पर टिकी हैं।