*आईआईटी खड़गपुर के प्लेटिनम जुबिली संवाद में भविष्य के आईआईटी की परिकल्पना*
शैक्षणिक, अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवा एवं उद्योग जगत के प्रतिष्ठित नेतृत्व ने आईआईटी को प्रतिभा निर्माण से राष्ट्रीय एवं वैश्विक परिवर्तन के वाहक के रूप में विकसित करने पर किया मंथन
कोलकाता, 17 अगस्त 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के प्लेटिनम जुबिली समारोह सप्ताह के अंतर्गत आज आईआईटी खड़गपुर रिसर्च पार्क, कोलकाता में “Beyond the IITs We Know: Building the IITs that the Nation and the World Will Need” विषय पर एक उच्चस्तरीय नेतृत्व संवाद का आयोजन किया गया।

दिनभर चले इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, चिकित्सा विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, नवप्रवर्तकों और विशिष्ट पूर्व छात्रों ने भाग लिया तथा बदलती राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप आईआईटी व्यवस्था के भविष्य पर विचार-विमर्श किया।
स्वागत संबोधन देते हुए प्रो. सुमन चक्रवर्ती, निदेशक, आईआईटी खड़गपुर ने आईआईटी व्यवस्था से प्रतिभा निर्माण की अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर परिवर्तन का सृजक बनने का आह्वान किया। आईआईटी खड़गपुर की 75 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान की स्थापना एक राष्ट्रीय आवश्यकता से हुई थी और आज तेजी से बदलते भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता है।

प्रो. चक्रवर्ती ने भविष्य के आईआईटी के लिए पांच प्रमुख बदलावों पर बल दिया—उत्कृष्टता के अलग-अलग केंद्रों से उत्कृष्टता के नेटवर्क की ओर; अनुसंधान उत्कृष्टता से अनुसंधान के वास्तविक प्रभाव की ओर; विभाग-आधारित व्यवस्था से समन्वित एवं अभिसरण मंचों की ओर; रोजगार चाहने वालों से अवसर सृजित करने वालों के निर्माण की ओर; तथा वैश्विक पहचान वाले राष्ट्रीय संस्थानों से राष्ट्रीय उद्देश्य वाले वैश्विक संस्थानों की ओर।
उन्होंने ज्ञान और अनुसंधान को वास्तविक सामाजिक प्रभाव में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आईआईटी को विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, उद्योगों, एमएसएमई, सरकार और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र के साथ अपने संबंधों को और सुदृढ़ करना होगा। साथ ही अनुसंधान की यात्रा को खोज से अनुवाद, क्रियान्वयन, उद्यम और सामाजिक प्रभाव तक पहुंचाना होगा।
कार्यक्रम में “Reimagining the IIT System: From National Institutions to Global Innovation Engines” विषय पर मुख्य वक्तव्य के साथ अनेक नेतृत्व पैनल आयोजित किए गए। इनमें ‘Mentor of Mentors’ के रूप में आईआईटी पारिस्थितिकी तंत्र, प्रभावोन्मुख अनुसंधान, भविष्य की शिक्षा-अनुसंधान एवं नवाचार में अभिसरण, स्वास्थ्य सेवा में नवाचार, भविष्य के भारत के लिए आईआईटी तथा परिवर्तनकारी भूमिका में प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के योगदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
विचार-विमर्श में साझा राष्ट्रीय अनुसंधान अवसंरचना, शिक्षा–उद्योग–सरकार के बीच मजबूत सहभागिता, अंतःविषय नवाचार, उद्यमिता तथा रिसर्च पार्कों को शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप, चिकित्सा विशेषज्ञों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं को जोड़ने वाले प्रभावी ट्रांसलेशन इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
आईआईटी व्यवस्था के अगले चरण की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए प्रो. चक्रवर्ती ने कहा कि पहले 75 वर्षों ने यह सिद्ध किया कि भारत विश्व के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों के समकक्ष संस्थान बना सकता है; वहीं अगले 25 वर्षों में यह सिद्ध करना होगा कि भारत में निर्मित संस्थान एक बेहतर विश्व के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम का समापन प्रो. सिद्धार्थ मुखोपाध्याय, डीन, पूर्व छात्र मामले, आईआईटी खड़गपुर द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कार्यक्रम में सहभागी प्रतिष्ठित वक्ताओं, पैनल सदस्यों, पूर्व छात्रों एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह कार्यक्रम आईआईटी खड़गपुर के प्लेटिनम जुबिली समारोह का हिस्सा है, जो संस्थान के शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में 75 वर्षों के योगदान का उत्सव मनाने के साथ-साथ राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ वैश्विक प्रभाव की दिशा में उसके आगामी अध्याय की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
— आईआईटी खड़गपुर








