ER/Press Release : 2026/05/15
*डबल-इंजन बूस्ट: प्रशासनिक बाधाएँ दूर होने से पूर्व रेलवे की प्रमुख परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार*
कोलकाता, 07 मई, 2026:
कई वर्षों से, पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए रेल यात्रा को सुरक्षित और तेज बनाने हेतु महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ रुकी हुई थीं। इसका कारण धन या रेलवे की इच्छाशक्ति की कमी नहीं, बल्कि तत्कालीन राज्य सरकार के लगातार सहयोग की कमी थी। सार्वजनिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण पुलों की खराब होती स्थिति को लेकर बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद, पिछली सरकार की निष्क्रियता के कारण कई प्रमुख परियोजनाएँ पूरी तरह ठप हो गई थीं। इस सुनियोजित उपेक्षा के चलते रेलवे प्रशासन को लगातार प्रशासनिक देरी से जूझना पड़ा, जबकि सार्वजनिक संपत्तियों की संरचनात्मक मजबूती कमजोर होती गई।

इस उपेक्षा का सबसे चिंताजनक उदाहरण हावड़ा स्टेशन के पास बनारस और चांदमारी रोड ओवर ब्रिज हैं। महीनों तक रेलवे प्रशासन ने इन पुलों की तेजी से बिगड़ती स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनियां जारी कीं। तकनीकी जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ये संरचनाएं सड़क उपयोगकर्ताओं और नीचे से गुजरने वाली ट्रेनों दोनों के लिए सीधा खतरा बन चुकी हैं। 10 फरवरी 2026 की एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य सरकार ने एक सप्ताह के भीतर ट्रैफिक ब्लॉक देने का वादा किया था ताकि मरम्मत कार्य शुरू हो सके, लेकिन यह वादा पूरा नहीं किया गया। इस दौरान चांदमारी पुल पर टूटे हिस्सों के कारण नागरिकों के गिरने जैसी दुखद घटनाएं भी सामने आईं, जो मानव जीवन के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर ने इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रयासों का नेतृत्व किया। उन्होंने लगातार राज्य अधिकारियों से संपर्क किया और इस बात पर जोर दिया कि रेलवे इन परियोजनाओं के लिए 100% फंडिंग कर रहा है, जिसके लिए राज्य से कोई वित्तीय योगदान की आवश्यकता नहीं है। बावजूद इसके, मॉनसून से पहले कार्य शुरू करने की उनकी अपीलों और संभावित दुर्घटनाओं को टालने के प्रयासों को अनदेखा किया गया, जिससे हजारों दैनिक यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। यही स्थिति कई मल्टी-ट्रैकिंग और बायपास परियोजनाओं में भी देखी गई, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जरूरी थीं।
नैहाटी-रानाघाट खंड और रानाघाट-कृष्णानगर खंड की तीसरी लाइन परियोजनाएं जिला प्रशासन द्वारा भूमि मानचित्रों को लेकर लगातार बदलती मांगों के कारण प्रभावी रूप से रुकी हुई हैं। जुलाई 2025 तक सभी आवश्यक योजनाएं प्रस्तुत करने के बावजूद, मानक सर्वेक्षण नक्शों को मान्यता देने से इनकार ने गतिरोध पैदा किया। इसी तरह, साईंथिया बायपास परियोजना, जिसे पांच वर्ष पहले विशेष रेलवे परियोजना घोषित किया गया था, में अब तक भूमि हस्तांतरण नहीं हुआ है। कानूनी अधिसूचनाएं जारी होने के बावजूद, स्थानीय लोगों को मुआवजा न दिए जाने के कारण 2020 से यह परियोजना रुकी हुई है। इसके अलावा, चंदनपुर-शक्तिगढ़ चौथी लाइन, मुरारई-बरहरवा तीसरी लाइन और डानकुनि-बाल्टिकुड़ी तीसरी एवं चौथी लाइन जैसी परियोजनाओं के लिए अप्रैल 2025 में ही सक्षम प्राधिकरण की नियुक्ति का अनुरोध किया गया था, लेकिन पूर्व सरकार ने इस दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया।
अब राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय के साथ पूर्व रेलवे को उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। प्रशासनिक देरी और जानबूझकर पैदा किए गए गतिरोध का दौर समाप्त होने की उम्मीद है, जिससे श्री मिलिंद देऊस्कर का आधुनिक और सुरक्षित रेलवे नेटवर्क का सपना साकार हो सकेगा। बनारस पुल के पुनर्निर्माण को अब प्राथमिकता दी जा सकती है, जिसके लिए चार महीने का निर्बाध कार्य आवश्यक है, ताकि परिवहन मार्ग के पूर्ण रूप से ध्वस्त होने से बचाया जा सके। नया प्रशासनिक माहौल भूमि अधिग्रहण और स्वीकृति प्रक्रियाओं को तेज करेगा, जो पहले देरी का कारण बनी हुई थीं, और इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को अंततः पूरा किया जा सकेगा।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझि ने कहा, “हमारे यात्रियों और जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछली सरकार द्वारा उत्पन्न प्रशासनिक बाधाओं के हटने के साथ, अब हम इन लंबित परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। हम दिन-रात काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि पश्चिम बंगाल के लोगों को विश्वस्तरीय, सुरक्षित और कुशल रेलवे बुनियादी ढांचा मिल सके, और लंबे समय से प्रतीक्षित विकास और संपर्क का वादा पूरा हो सके।”










