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हिंदी विश्वविद्यालय (हावड़ा) में नवाचार और प्रभावी शिक्षण की नई पहल

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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हिंदी विश्वविद्यालय (हावड़ा) में नवाचार और प्रभावी शिक्षण की नई पहल

कोलकाता (21 मई 2026) : पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित हिंदी विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. नंदिनी साहू के नेतृत्व में शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। विश्वविद्यालय परिसर में बीते दो वर्षों के दौरान शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण को नई ऊर्जा मिली है, जिससे छात्रों और शोधार्थियों के बीच सकारात्मक और रचनात्मक माहौल विकसित हुआ है।

विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन करते हुए सेमेस्टर प्रणाली को सुदृढ़ किया तथा रोजगारोन्मुख और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए परीक्षा प्रणाली में समर्थ पोर्टल जैसे डिजिटल साधनों को लागू किया तथा कैंपस को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने की पहल की।

कुलपति प्रो. नंदिनी साहू के कार्यकाल में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। हिंदी विभाग के छात्र राज जायसवाल ने IBPS PO परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इतिहास विभाग के छात्र कुंदन वर्मा ने NET परीक्षा उत्तीर्ण की, जबकि पूनम कुमारी बिंद ने BPSC परीक्षा पास कर बिहार के लखीसराय जिले में शिक्षक पद का कार्यभार संभाला। अनुवाद अध्ययन विभाग के नीतिश कुमार यादव ने SSC CHT 2024 परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 17वीं रैंक प्राप्त कर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में स्थान प्राप्त किया। वहीं राजनीति विज्ञान विभाग की आरती कुमारी और कबिता कुमारी ने BPSC TRE-3 परीक्षा में सफलता प्राप्त कर बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षक पद हासिल किया।

विश्वविद्यालय में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप संस्कृति, शोध अनुदान और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है। विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग और छात्र विनिमय कार्यक्रमों की दिशा में भी पहल की गई है। विश्वविद्यालय में आधुनिक छात्रावास, स्मार्ट क्लासरूम और केंद्रीय पुस्तकालय के आधुनिकीकरण का कार्य भी प्रगति पर है।

छात्रों के व्यक्तित्व विकास और व्यवहारिक शिक्षा को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में पहली बार अनुवाद कार्यशालाओं, छात्र कौशल प्रशिक्षण और शिक्षण कौशल आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में प्रस्तावना कौशल, व्याख्या कौशल, प्रश्न कौशल, पुनर्बलन कौशल तथा कक्षा प्रबंधन जैसे विषयों को शामिल किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि प्रभावी शिक्षण केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें आलोचनात्मक सोच, संवाद क्षमता और समस्या समाधान कौशल का विकास भी शामिल होना चाहिए।

इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने छात्र-केंद्रित माहौल विकसित करने के लिए ई-लर्निंग संसाधनों, व्यवहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट और नेतृत्व विकास जैसे कार्यक्रमों को भी प्रोत्साहित किया है। वर्ष 2025 और 2026 के दौरान IQAC, शिकायत निवारण सेल, लैंगिक समानता सेल, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सेल, छात्र कल्याण प्रकोष्ठ तथा ICC जैसे विभिन्न प्रभागों और समितियों की स्थापना की गई, जो सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

विशेष उल्लेखनीय यह है कि विश्वविद्यालय में पहली बार सहकर्मी समीक्षा आधारित द्विभाषी अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘हुजिस’ का संपादन एवं प्रकाशन कार्य प्रारंभ हुआ। साथ ही विश्वविद्यालय का प्रथम न्यूजलेटर प्रकाशित किया गया तथा तुलनात्मक विश्व साहित्य पर व्याख्यान श्रृंखला की शुरुआत की गई, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। यह व्याख्यान श्रृंखला आज भी निरंतर जारी है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि एक ऐसे ज्ञान-आधारित समाज का निर्माण करना है, जहाँ नवाचार, प्रभावी शिक्षण, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों का संतुलित विकास हो सके। इसी दृष्टि के साथ हिंदी विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।