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“बज़्मे- एवाने- ग़ज़ल” के ज़ेरे- एहतिमाम अज़ीमुश्शान माहाना तरह़ी नशिस्त का इनइक़ाद

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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“बज़्मे- एवाने- ग़ज़ल” के ज़ेरे- एहतिमाम अज़ीमुश्शान माहाना तरह़ी नशिस्त का इनइक़ाद
बाराबंकी, सआदतगंज की बेहद फ़आल अदबी तंज़ीम “बज़्मे- एवाने- ग़ज़ल” के ज़ेरे- एहतिमाम आईडियल इंटर कॉलेज, मुहम्मदपुर बाहूँ में एक अज़ीमुश्शान माहाना तरह़ी नशिस्त का इनइक़ाद अमल में आया, जिसकी सदारत आस़ी चौखंडवी ने फ़रमाई, तंज़ो- मिज़ाह के अलबेले शायर बेढब बाराबंकवी की निज़ामत में होने वाली इस बेहद हसीन नशिस्त का आग़ाज़ मुश्ताक़ बज़्मी ने नाते- रसूल से किया और सारी फ़िज़ा को रूहानी बना दिया।
इसके बाद दिए गए मिसरए- तरह़
“कैफ़े- जाँ उतरने में देर कितनी लगती है”
पर बाक़ायदा तौर पर नशिस्त का आग़ाज़ हुआ, नशिस्त बेहद कामयाब रही, बहुत ज़्यादा दादो- तहसीन पाने वाले अशआर का इंतिख़ाब नज़्रे- क़ारईन है, मुलाहिज़ा फ़रमाएँ।
क्या से क्या बनाती है एक जुंबिशे- मिज़गाँ
धूप-छाँव करने में देर कितनी लगती है
आस़ी चौखंडवी
डूबता हूँ जब उसकी झील जैसी आँख में
डूब कर उभरने में देर कितनी लगती है
बेढब बाराबंकवी
हमने जिन परिंदों को ख़ुद सिखाया हो उड़ना
उनके पर कतरने में देर कितनी लगती है
ज़की तारिक़ बाराबंकवी
बस शिकार बन जाए इश्क़ बदगुमानी का
चाहतों के मरने में देर कितनी लगती है
मुश्ताक़ बज़्मी
जोशे- दिल उभरने में देर कितनी लगती है
कुछ भी कर गुज़रने में देर कितनी लगती है
नाज़िश बाराबंकवी
एक ज़माना लगता है औज पर पहुँचने में
औज से उतरने में देर कितनी लगती है
सहर अय्यूबी
तेरे बाद जो दिल में हो गई जगह ख़ाली
इस ख़ला को भरने में देर कितनी लगती है
उबैद अज़्मी
इन शायरों के अलावा अली बाराबंकवी, मिस्बाह रहमानी, जान वारिस सहबा, सग़ीर क़ासमी और अबूज़र अंसारी ने भी अपना अपना तरह़ी कलाम पेश किया और शायरों व सामईन से ख़ूब दादो- तहसीन हासिल की।
सामईन में इरशाद अंसारी, मास्टर मुहम्मद वसीम, मास्टर मुहम्मद क़सीम, मास्टर मुहम्मद वसीम, इज़हार हयात और मास्टर मुहम्मद राशिद के अस्माए- गिरामी भी लायक़े- ज़िक्र हैं।
बज़्मे- एवाने- ग़ज़ल की आइंदा तरह़ी नशिस्त दर्ज ज़ैल मिसरे पर 29 नवंबर, बरोज़ इतवार को होगी।
“क्या करूँ मैं वो मेरे दिल से निकलता ही नहीं”
क़ाफ़िया: निकलता
रदीफ़: ही नहीं
नशिस्त के इख़्तिताम पर बज़्मे- एवाने- ग़ज़ल के सद्र ज़की तारिक़ बाराबंकवी ने तमाम शिरका का शुक्रिया अदा करते हुए आइंदा तरह़ी नशिस्त में शिरकत करने की गुज़ारिश भी की।