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*आईआईटी खड़गपुर रिसर्च पार्क में ‘द आर्ट ऑफ डूइंग इकोनॉमिक रिफॉर्म्स’ पर श्री संजीव सान्याल का प्रेरणादायी व्याख्यान*

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ASANSOL DASTAK ONLINE DESK

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प्रेस विज्ञप्ति (हिन्दी)

*आईआईटी खड़गपुर रिसर्च पार्क में ‘द आर्ट ऑफ डूइंग इकोनॉमिक रिफॉर्म्स’ पर श्री संजीव सान्याल का प्रेरणादायी व्याख्यान*

कोलकाता, 4 अगस्त 2026: आईआईटी खड़गपुर के प्लैटिनम जुबिली समारोह के अंतर्गत आईआईटी खड़गपुर रिसर्च पार्क में “द आर्ट ऑफ डूइंग इकोनॉमिक रिफॉर्म्स” विषय पर एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में श्री संजीव सान्याल, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (Economic Advisory Council to the Prime Minister) के सदस्य तथा गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स के चांसलर उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम में 450 से अधिक विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों तथा नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “विकसित भारत @2047” की दिशा में प्रभावी आर्थिक एवं प्रशासनिक सुधारों की भूमिका रहा।

अपने प्रेरक व्याख्यान में श्री संजीव सान्याल ने कहा कि भारत के विकास की गति केवल बड़े नीतिगत सुधारों से ही नहीं, बल्कि ‘प्रोसेस रिफॉर्म्स’ अर्थात प्रशासनिक प्रक्रियाओं में छोटे, लक्षित और निरंतर सुधारों से भी निर्धारित होती है। उन्होंने बताया कि प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक चरणों को समाप्त करना, पारदर्शिता बढ़ाना तथा तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, तेज और नागरिक-केंद्रित बनाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि किसी भी सुधार की शुरुआत वास्तविक प्रक्रियाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण और प्रमुख अवरोधों की पहचान से होनी चाहिए।

विभिन्न प्रशासनिक केस स्टडी प्रस्तुत करते हुए श्री सान्याल ने बताया कि किस प्रकार सुविचारित प्रक्रिया सुधारों ने सरकारी सेवाओं की दक्षता बढ़ाई, समय में उल्लेखनीय कमी लाई तथा नागरिकों और उद्योगों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल तकनीक तभी प्रभावी होती है जब उसके साथ प्रक्रियाओं का भी समुचित पुनर्गठन किया जाए।

श्री संजीव सान्याल ने कहा— “विकसित भारत की यात्रा केवल बड़े सुधारों से नहीं, बल्कि हजारों छोटे, व्यावहारिक और नागरिक-केंद्रित प्रक्रिया सुधारों से आगे बढ़ेगी। जब शासन सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनता है, तभी राष्ट्रीय परिवर्तन की मजबूत नींव तैयार होती है।”

कार्यक्रम का स्वागत करते हुए आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने शिक्षा, अनुसंधान और नीति-निर्माण के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा— “विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा जब शिक्षण संस्थान ज्ञान, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नीति-निर्माण के बीच सशक्त सेतु का कार्य करेंगे। आईआईटी खड़गपुर नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्रीय विकास के लिए सार्थक संवाद को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा।”

कार्यक्रम के समापन से पूर्व प्रो. सुमन चक्रवर्ती और श्री संजीव सान्याल के बीच एक अत्यंत रोचक फायरसाइड चैट आयोजित की गई। इस संवाद में भारत के आर्थिक सुधारों, नवाचार, उच्च शिक्षा, अनुसंधान, उद्यमिता तथा विकसित भारत @2047 की दिशा में अकादमिक संस्थानों की भूमिका पर गहन चर्चा हुई। प्रतिभागियों के प्रश्नों और विचारों ने इस सत्र को और अधिक सार्थक एवं प्रेरणादायी बना दिया।

यह कार्यक्रम आईआईटी खड़गपुर रिसर्च पार्क की उस प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण रहा, जिसके माध्यम से अकादमिक जगत, उद्योग, नीति-निर्माताओं और समाज के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर भारत के भविष्य के लिए नवाचार एवं नेतृत्व को नई दिशा प्रदान की जा रही है.

धन्यवाद

प्रतीक दामा
जनसंपर्क अधिकारी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर, खड़गपुर, पश्चिम बंगाल, भारत – ७२१३०२
मोबाईल – ९९७५६५४२०२