बाराबनी में राशन व्यवस्था में बड़ा सुधार: सरकार बदलते ही गरीबों को मिलने लगा पूरा अनाज, डीलरों में खुशी
अब नहीं होगी राशन में डंडीमार! पैकेट के आटे की जगह मिला पूरा
किलो गेहूं और चावल
बाराबनी राशन घोटाला खत्म? नई सरकार के आते ही बदली राशन दुकानों की सूरत, सूरज सिंह और डीलरों ने जताई संतुष्टि
बाराबनी:पश्चिम बंगाल के बाराबनी इलाके में सरकार बदलने के मात्र एक महीने के भीतर ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Ration System) में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। इस नए बदलाव से जहाँ एक तरफ राशन दुकान के मालिक (Dealers) बेहद खुश हैं, वहीं दूसरी तरफ गरीब परिवारों को भी उनका पूरा हक मिल रहा है।
चावल की कम सप्लाई, फिर भी डीलर खुश?
आमतौर पर राशन की सप्लाई कम होने पर विवाद होता है, लेकिन इस बार बाराबनी के राशन डीलर सरकार के फैसले से संतुष्ट हैं। डीलरों का कहना है कि पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत राशन में जो आटा पैकेट में सप्लाई किया जाता था, उसमें अक्सर वजन कम होने (डंडी मारने) की शिकायतें आती थीं। 1 किलो के पैकेट में पूरा वजन नहीं रहता था, जिससे डीलरों को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब चावल के साथ-साथ पैकेट वाले आटे की जगह सीधे साबुत गेहूं दिया जा रहा है।
पारदर्शिता से जनता को सीधा फायदा
अब उपभोक्ताओं को 1 किलो के वजन में पूरा 1 किलो गेहूं और साथ में तय मात्रा का चावल मिल रहा है। वजन में इस पारदर्शिता के कारण गरीब परिवारों को पूरा अनाज मिल पा रहा है और बिचौलियों या पैकेजिंग के दौरान होने वाली चोरी पर लगाम लग गई है।
सूरज सिंह और राशन डीलर मुन्ना जायसवाल का बयान
इस पूरे मामले पर आसनसोल सबडिवीजन के युवा मोर्चा नेता सूरज सिंह ने कहा, “सरकार बदलते ही प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ी है। पहले गरीबों के राशन के नाम पर बड़ा खेल होता था, आटे के पैकेट में वजन कम देकर गरीबों का हक मारा जाता था। लेकिन नई सरकार की नीति साफ है—गरीबों को पूरा अधिकार मिलेगा और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
वहीं, स्थानीय राशन डीलर मुन्ना जायसवाल ने भी इस बदलाव की सराहना करते हुए कहा, “पहले आटे के पैकेटों में वजन कम होने की वजह से हमें ग्राहकों के सामने शर्मिंदा होना पड़ता था और हमारा नुकसान भी होता था। अब सीधे गेहूं और चावल की पूरी सप्लाई मिल रही है। 1 किलो का मतलब पूरा 1 किलो है। इस व्यवस्था से हम डीलर और आम जनता दोनों बेहद राहत महसूस कर रहे हैं।”
यह बदलाव यह साफ संकेत देता है कि बाराबनी और आस-पास के क्षेत्रों में अब सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी धांधली के सीधे असली हकदारों तक पहुँच रहा है।










