“बोल बम का नारा है,
बाबा एक सहारा है।
काँवर उठाई भक्तों ने,
शिव ही तो किनारा है॥
बोल बम का नारा है,
बाबा एक सहारा है।
बोल बम…बोल बम !..
नंगे पाँव चलेंगे हम,
भक्ति से जल चढ़ाएँगे।
हर हर महादेव कहकर,
मन के रोग मिटाएँगे॥
बोल बम…बोल बम !..
बोल बम का नारा है,
बाबा एक सहारा है।
जटा में गंगा विराजे,
कंठ में नाग प्यारा है।
त्रिपुंड लगाए बाबा,
वो सबका रखवाला है॥
बोल बम का नारा है,
बाबा एक सहारा है।
बोल बम…बोल बम !..
कैलाशपति शंकर हैं,
दुखियों के दुख हरे हैं।
श्रावण में जो जपे नाम,
उसके भाग्य सवारे हैं॥
बोल बम का नारा है,
बाबा एक सहारा है।
बोल बम…बोल बम !..
डमरू की जो गूंज उठे,
संसार जाग जाता है।
भस्म रमा है तन पर,
वो मृत्यु को भी हरता है॥
बोल बम का नारा है,
बाबा एक सहारा है।
बोल बम…बोल बम !..
भक्ति में जो डूब गया,
उसका बेड़ा पार हुआ।
भोलें के चरणों में “सुमन”,
सब जीवन संवार हुआ॥
बोल बम का नारा है,
बाबा एक सहारा है।
बोल बम…बोल बम !..”
🔔 हर हर महादेव! बोल बम! 🔔
*✍️ रचयिता: “सुशील कुमार सुमन”*
अध्यक्ष, आईओए
सेल आईएसपी बर्नपुर



















