बोलबम के जयकारों से गूंजी कोयलांचल की धरा: सिद्धेश्वरी नाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, मंत्री डॉ. अजय पोद्दार ने खुद बांटा प्रसाद
बराकर। सावन महीने की अंतिम सोमवारी पर बराकर के प्रसिद्ध बाबा सिद्धेश्वरी नाथ मंदिर में आस्था का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। पूरी रात कांवड़ियों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा क्षेत्र ‘बोलबम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। इस पावन अवसर पर लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बाबा का जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे कांवड़ यात्रा पथ पर सेवा शिविरों और भव्य भंडारों की धूम रही।मंत्री डॉ. अजय पोद्दार ने खुद संभाली भंडारे की कमानहर सोमवारी की तरह इस अंतिम सोमवारी पर भी स्थानीय विधायक सह राज्य के मंत्री डॉ. अजय पोद्दार बैगुनिया स्थित भंडारे में खुद उपस्थित रहे। उन्होंने अपने हाथों से कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण कर सेवा दी। मंत्री की इस सादगी और सेवा भाव को देखकर आम श्रद्धालु बेहद उत्साहित नजर आए।सेवा की अद्भुत मिसाल: हैदराबाद से आकर पिला रहे केसरिया दूधपूरे मंदिर परिसर और कांवड़ पथ पर स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा लगाए गए स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। इस दौरान सेवा की एक अनूठी मिसाल भी देखने को मिली। बराकर शिव मंदिर निवासी संजय अग्रवाल हर साल सावन में बाबा और उनके भक्तों की सेवा के लिए विशेष रूप से हैदराबाद (तेलंगाना) से यहां आते हैं। संजय अग्रवाल अपने पूरे परिवार के साथ भक्तों को गरमा-गर्म केसरिया दूध का वितरण करते दिखे, जिसकी चौतरफा सराहना हो रही है।स्टॉलों पर मिला नींबू पानी, खीर और गरमा-गर्म प्रसादस्वयंसेवी संस्थाओं और समितियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर भक्तों के लिए साक्षात् बाबा भोलेनाथ का दरबार सजाया गया था। कांवड़ियों की थकान मिटाने के लिए जगह-जगह पर चाय, बिस्कुट, शीतल जल, नींबू पानी, खीर, बुंदिया, पाइस और केसरिया दूध की चौबीसों घंटे निशुल्क सेवा दी गई।प्रशासन और ‘बोलबम सेवा समिति’ की मुस्तैदी से सफर हुआ सुगमलाखों की भीड़ के बावजूद सावन की चारों सोमवारी बिना किसी रुकावट और दुर्घटना के संपन्न हो गई। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और बोलबम सेवा समिति की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। इन लोगों के अथक प्रयास और दिन-रात की मुस्तैदी के कारण ही दूर-दराज से आए शिवभक्तों को जल अर्पण करने में कोई असुविधा नहीं हुई और पूरी व्यवस्था चाक-चौबंद रही।










